अंबिकापुर. मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन जीवन दीप समिति के कर्मचारियों को बाहर की रास्ता दिखाने की तैयारी में है। क्योंकि प्रबंधन के पास इन्हें वेतन देने के लिए रुपए नहीं बच रहा है। जीवन दीप समिति में १४० कर्मचारी कार्यरत हैं। इन्हें प्रबंधन को हर महीने करीब १५ लाख रुपए का भुगतान करना पड़ता है। अस्पताल प्रबंधन जीवन दीप समिति के कर्मचारियों को हटा कर यह राशि अस्पताल के विकास में खर्च करने की तैयारी कर रही है। जबकि पहले से जिला अस्पताल में रेग्यूलर व कलक्टर दर पर कर्मचारी कार्यरत हैं।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन जीवन दीप समिति के कर्मचारियों को बाहर की रास्ता दिखाने की तैयारी में है। क्योंकि प्रबंधन के पास इन्हें वेतन देने के लिए रुपए नहीं बच रहा है। जीवन दीप समिति में १४० कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रबंधन की नजर में यहां जरूरत से ज्यादा कर्मचारी हैं। इस कारण अस्पताल प्रबंधन जीवन दीप समिति से नियुक्त समस्त कर्मचारियों को निकालने की तैयारी कर रही है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फिलहाल में १४० कर्मचारी जीवन दीप से हैं। इन्हें हर महीने १५ लाख रुपए का भुगतान करना पड़ता है। वहीं प्रबंधन का मानना है कि अस्पताल के कई रेग्यूलर कर्मचारी के साथ-साथ कलक्टर दर के कर्मचारी भी हैं, जो कि पर्याप्त हैं। जीवन दीप समिति के कर्मचारियों को हटा देने के बावजूद भी अस्पताल के काम में कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जीवन दीप समिति से पर्याप्त रुपए भी नहीं आ रहे हैं। इस कारण इन्हें वेतन देने में भी परेशानी हो रही है। जीवन दीप समिति कंगाल हो चुकी है। इस कारण समस्त जीवन दीप समिति के कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी की जा रही है।
स्वशासी समिति है लागू
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि शासन द्वारा जिला अस्पताल में जीवन दीप समिति से कर्मचारियों को रखने का प्रावधान था। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद फरवरी २०१९ में जीवन दीप समिति को भंग कर स्वशासी समिति लागू की गई थी।

शासन से मिलते थे १० लाख रुपए
मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जिला अस्पताल में जीवन दीप समिति के लिए हर वर्ष अनुदान के रूप में शासन से १० से १५ लाख रुपए आते थे। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद शासन द्वारा दिए जाने वाला यह अनुदान बंद कर दिया गया है। इसके बाद से जीवनदीप के कर्मचारियों को अस्पताल द्वारा ही वेतन दिया जा रहा था।
अस्पताल के विकास में खर्च होगी राशि
मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन का मानना है कि जीवन दीप समिति से जो राशि आती है वह कर्मचारियों को देने में ही खर्च हो जाता है। इन कर्मचारियों को हटा कर वहां की राशि को अस्पताल के विकास में लगाया जाएगा।
काम का नहीं है पता
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जीवन दीप समिति के १४० कर्मचारी हैं। वहीं कलक्टर दर के ७४ व रेग्यूलर कर्मचारी भी हैं। इसके बावजूद अस्पताल की साफ-सफाई नहीं होती है। पूरे दिन कर्मचारी कहां और क्या करते हैं इसका कोई पता तक नहीं चल पाता है। वहीं निजी अस्पताल में कर्मचारी कम होने के बावजूद भी सफाई अधिक होती है।

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