अंबिकापुर। नवजात बच्चों की मौत के बाद प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने जहां एक ओर 48 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है वहीं मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में डीएमई के निर्देश पर पांच सदस्यीय टीम मंगलवार को पहुंची। जांच टीम ने एसएनसीयू में संचालित व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के साथ अस्पताल अधीक्षक डॉ.लखन सिंह, एसएनसीयू की प्रभारी डॉ.सुमन सहित अन्य से बारीकी से पूछताछ की। जांच टीम यह रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। बताया जा रहा है कि चार नवजातों की मौत के कुछ देर बाद एसएनसीयू में भर्ती पांचवें नवजात की भी मौत हो गई थी। महज तीन घंटे में हुई इन मौतों के बाद प्रशासन सकते में आ गया और दो दिनों से जांच, पड़ताल का दौर जारी है। जांच टीम में एम्स रायपुर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.राकेश नहरेल व डॉ.समीर जैन के अलावा इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड की अनुविभागीय अधिकारी रूपाली व नवल शामिल हैं। जांच टीम के द्वारा पूरे दिन एसएनसीयू के उपकरणों व इलाज के बारे में जानकारी लेती रही। नवजातों की मौत के मामले में विद्युत अवरोध की बात सामने आई थी। वहीं अस्पताल प्रबंधन के द्वारा बिजली बाधा का बच्चों की मौत से कनेक्शन नहीं माना जा रहा था। अस्पताल में बिजली बाधा की स्थिति न बनने पाए, इसके लिए आठ जनरेटर हैं। एमसीएच में 125 किलोवाट का जनरेटर लगा है। विद्युत अवरोध की स्थिति बनने पर घटना दिवस जनरेटर चालू करने के बाद लाइन पैनल के आगे नहीं बढ़ पाई, इस कारण एसएनसीयू में भी बिजली गुल हो गई थी। बिजली बैकअप खत्म होने के बाद एसएनसीयू के स्टाफ नर्स ने कुछ बच्चों को स्वजनों को सौंप कर सीने से लगाकर और गर्म कपड़े, कंबल से ढंक कर रखने कहा था। बिजली चालू होने पर बच्चों को वापस ले लिया गया। मामले को लेकर उच्च स्तर तक मचे हड़कंप के बाद सीनियर चिकित्सक भी राउंड लेने में लगे हैं।

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