आदिवासी वर्ग की महिलाओं ने आईजी व एसपी से शिकायत कर जमीन वापस दिलाने की मांग  


अंबिकापुर। आदिवासी की पैतृक भूमि को छलपूर्वक अपने नाम दर्ज करवाने और उस पर जबरन कब्जा करने का मामला सामने आया है। आरोप है जब वे अपने पैतृक भूमि से कब्जा हटाने के लिए कब्जाधारक को कहे तो उसने जान से मारने की धमकी देते हुए भगा दिया। पीडि़त ने इसकी शिकायत पुलिस महानिरीक्षक व सरगुजा पुलिस अधीक्षक से लिखित में की है। आजाक थाने में भी अपराध दर्ज करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा है।
मेंड्राकला निवासी चिंता बाई पति रामरतन उरांव 60 वर्ष व लखनपुर तहसील के ग्राम अंधला में रहने वाली उसकी बहन टैक्सी बाई पति शिवप्रसाद 57 वर्ष ने बताया कि अंबिकापुर के लक्ष्मीपुर में उनके पूर्वज स्वर्गीय सुखु उरांव की स्व अर्जित संपत्ति है, जो सरगुजा स्टेट के दौरान उनके नाम पर व्यवस्थापित हुई थी। स्व.सुखू उरांव के तीन पुत्र विशुन, खोसवा एवं सुमारू हैं, जिनमें से स्व.खोसवा की नि:संतान मृत्यु हो चुकी है। स्व.सोमारू की दो पुत्री व स्व.विसुन के दो पुत्र जीतन एवं मितन हंै। आदिवासी वर्ग की कृषि भूमि किसी भी रुप से सामान्य वर्ग के व्यक्ति के पक्ष में अंतरित नहीं हो सकती है। दोनों महिलाओं का आरोप है कि उनकी पैतृक भूमि को अंबिकापुर के अग्रसेन वार्ड के निवासी एक व्यक्ति के द्वारा हड़प लिया गया है। उनके अशिक्षित होने व भोलेपन का लाभ उठाते हुए तत्कालीन राजस्व कर्मचारियों से मिलीभगत करके उसने राजस्व पत्रों में अपने नाम पर उक्त भूमि को दर्ज करवा लिया और उक्त जमीन को बाउंड्री वॉल से घेरकर जबरन कब्जा किया गया है। वे जब अपनी जमीन से कब्जा हटवाने के लिए पहुंचे तो उसने गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दी और उन्हें भाग जाने के लिए कहा। आईजी और एसपी को सौंपे गए शिकायत पत्र में जमीन पर कब्जा करने वाले व्यक्ति पर अपराध दर्ज करने एवं पैतृक भूमि वापस दिलाए की मांग की गई है।

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