रामानुजनगर। विकासखण्ड के ग्राम पंचायत दवना के पशुपालकों व पंचायत की असंवेदनशीलता के कारण आसपास के गांवों के कृषक बेहद परेशान हैं। लगभग एक महीने से दवना के ग्रामीणों द्वारा अपने मवेशियों को खुला छोड़ दिया जा रहा है, जो खेत में लगी रवि फसलों को चट कर दे रहे हैं। किसानों को काफी नुक़सान उठाना पड़ रहा है। सरकार के महत्वाकांक्षी नरवा, गरूआ योजना के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। गोठान योजना का सरकार ढिंढोरा पीट रही है, दूसरी ओर 90 प्रतिशत गोठानों की हालत खराब है। एक भी मवेशी शासकीय गोठानों में नहीं हैं। गोठानों में कोई व्यवस्था नहीं होने का खामियाजा खेतिहर किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खेती के मौसम और रवि फसल के खेतों में लगे रहने के कारण क्षेत्र के किसी भी गांव में पशुपालक अपने मवेशी को खुला नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं दवना ग्राम के पशुपालक एक माह पहले से ही अपने मवेशी को चरने के नाम पर छोड़ दे रहे हैं, जो समीपस्थ ग्राम पतरापाली, पंपानगर, परशुरामपुर, सेंदुरी सरई पारा के कृषकों के गेंहू, सरसों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम दवना तथा पुरे विकासखण्ड में कम से कम एक माह तक मवेशियों को खुला छोड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए। प्रशासन स्तर पर यदि रोक नहीं लगाया जाता है तो मवेशियों के कारण कृषकों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि सरकारी गोठानों के कारण गांव गांव में संचालित कांजी हाउस का संचालन भी पंचायतों ने बंद कर दिया है।

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