क्रशर संचालक गिट्टी खनन के लिए अपना रहे मनमाना हथकंडा
कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों ने कहा-जनचौपाल में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

गिरजा ठाकुर


अंबिकापुर। सरगुजा जिले के ग्राम केपी अजिरमा में संचालित क्रशरों में की जाने वाली ब्लास्टिंग ने ग्रामीणों का चैन छीन लिया है। इनके घरों में दरारें आ रही हैं। ब्लास्टिंग के बीच मलबे घरों में गिर रहे हैं, जिससे खतरे की स्थिति बनी रहती है। इनके द्वारा कलेक्टर के जनचौपाल में आवेदन दिया गया लेकिन क्रशर संचालकों को सुरक्षा की दृष्टि से पहल करने किसी प्रकार का दिशानिर्देश नहीं दिया गया, ना ही किसी प्रकार की कार्रवाई की गई। ऐसे में ग्रामीण छोटे बच्चों के साथ घर छोड़कर कलेक्टोरेट अंबिकापुर पहुंचे और अपनी व्यथा से पत्रकारों को अवगत कराए।


इनका कहना था कि क्रशर संचालक अपनी संपन्नता और पहुंच के आगे उन्हें घुटने टेकने लंबे समय से विवश कर रहे हैं। इनका आरोप है कि क्रशर संचालक शासकीय और निजी भूमि से गिट्टी उत्खनन के लिए आए दिन ब्लास्टिंग करते हैं, जिसके धमाके से उनके बच्चे दहल जाते हैं। बुजुर्गों की धड़कन बढ़ जाती है। घर में कंपन की स्थिति बनती है। इन क्रशरों की उनके घरों से दूरी महज पांच-सात सौ मीटर है। गांव में संचालित इन क्रशरों में गिट्टी के लिए सारे सुरक्षा मापदंडों को दरकिनार कर दिया जा रहा है, जिससे कब अनहोनी की स्थिति बन जाए कह पाना मुश्किल रहता है। ब्लास्टिंग के बीच होने वाले कंपन से कच्चे मकानों के गिरने का खतरा बना रहता है। घरों के शौचालय तक गिरने के कगार पर पहुंच रहे हैं, इससे क्रशर संचालकों को कोई लेना-देना नहीं है। ग्रामीणों ने बताया सिर्फ उनके मकान नहीं बल्कि शासकीय भवन, सामुदायिक भवन व पक्के मकानों के छत से भी छोटे स्लैब ब्लास्टिंग के दौरान गिरते हैं।  


आदिवासियों की जमीन भी सुरक्षित नहीं
कलेक्टोरेट पहुंचे ग्रामीणों का आरोप है कि क्रशर संचालक धन-संपन्नता की बदौलत आदिवासियों की जमीन में भी बेखौफ होकर गिट्टी के लिए ब्लास्टिंग करने में लगे हैं। केपी के ग्रामीणों ने बीते चार जनवरी को भी इसकी शिकायत जिला प्रशासन से की है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे असुरक्षित तरीके से कहीं भी ब्लास्टिंग करने का दौर नहीं थमा है। ग्रामीणों ने बताया कि दो मार्च 2021 एवं नौ अप्रैल 2021 को भी उनके द्वारा कलेक्टर सरगुजा का इस ओर ध्यानाकर्षण कराया गया है। लिखित शिकायत देने के बाद भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने से क्रशर संचालकों का हौसला बढ़ा हुआ है।


गांव में सात क्रशर हैं संचालित
कलेक्टर से पुन: जान-माल की सुरक्षा करने की फरियाद लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने बताया उनके गांव की सीमा में सात क्रशरों का संचालन किया जा रहा है। गिट्टी खनन के लिए मनमाना भूमि का उपयोग करने में क्रशर संचालक लगे हैं। क्रशर संचालन के नियमों को ताक पर रखने से पर्यावरणीय संकट की स्थिति भी बनी हुई है। इन हालातों के बीच वे असुरक्षित तरीके से जीवन-यापन करने में लगे हैं। कलेक्टोरेट पहुंचे हरमनिया, राहुल, लीलावती गिरी, सावित्री यादव, नरेश, आशा सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा उनके घरों की स्थिति दयनीय होते जा रही है। वे आर्थिक रूप से इतना मजबूत नहीं हैं कि घरों में पड़ रही दरार को रोकने कोई पहल कर सकें। ऐसे में प्रशासन पर उनकी उम्मीद टिकी है।
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