0 3 घण्टे इंतजार के बाद बैरंग लौटे 
ओड़गी। कलेक्टर जहां क्षेत्र की व्यवस्था को सुधार कर लोगो को स्थानीय स्तर पर सुविधा प्रदान करने का प्रयास कर रहे है। इसके लिए कलेक्टर जिला प्रशासन के तमाम अधिकारियों के साथ कई बार क्षेत्र का दौरा कर चुके है और कर भी रहे है। मगर प्रशासन के नुमाइंदे ही व्यवस्था को ठेंगा दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे है, या फिर यह भी कह सकते है कि वे नहीं सुधरने की अपनी पुरानी परंपरा को कायम रखना चाहते है।  बिहारपुर क्षेत्र में दौरा व व्यव्स्था में सुधार के लिए क्षेत्रीय विधायक सहित जिले के कलेक्टर का प्रतिमाह में दो चार भ्रमण करना कुछ भी सार्थक नही हो रहा है। भाजपा राज में पहले बिहारपुर में  सप्ताहिक उपतहसील स्थापना कर शुक्रवार को लगता था। सरकार बदली फिर काग्रेस की सरकार द्वारा बिहारपुर को उप तहसील बनाकर दो तहसीलदार की नियुक्त कर दिया गया। अतिरिक्त कक्ष को उप तहसील भवन बनाया गया. लेकिन यहा के नियुक्त बाबु, आपरेटर, तहसीलदार बराबर छुटटी में रहते है। सोमवार को कई ग्रामीणो की पेशी थी उपतहसील में आने पर यहा ताला लगा रहा. ग्रामीण इधर उधर भटकते रहे. सजग ग्रामीणो ने संवाद सहित रायपुर में फोन कर वस्तु स्थिति की जानकारी दिया गया तो आनन -फानन में तहसील के लेखपाल साहब आये जिससे दो बजे के बाद उप तहसील का ताला खुल पाया। 11 बजे से इंतजार करते ग्रामीण 3 घंटे बाद चले गये. यहा पर गजब की मनमर्जी चल रही है. गांव के ग्रामीण सुरेन्द्र गुप्ता ने बताया कि बनने को उपतहसील बनाकर दो तहसीलदार को बैठा दिया गया है जबकि अधिकाश दिन बंद रहता है तहसील का ताला खुलता तक नही है जिससे ग्रामीण परेशान होकर भटकते रहते है। यहा बिना रिश्वत के कुछ भी काम नही होता. जिसकी शिकायत कलेक्टर से की जा चुकी है पर अब तक कुछ भी कार्यवाही नही हुई. जिम्मेदार अधिकारी इस तरह कार्य करेगे तो यहा की स्थिति कैसे सुधरेगी।

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