लाखों की जमीन को षड्यंत्रपूर्वक कौड़ियों के दाम रजिस्ट्री कराई गई
षड्यंत्र में किया गया महिलाओं का भी इस्तेमाल


अंबिकापुर। फर्जी तरीके से आदिवासी की जमीन हथियाने और रजिस्ट्री कराने के मामले में पुलिस ने नौ आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जमीन स्वामी की हुई मौत के बाद पुलिस की जांच में सामने आया कि लाखों की जमीन को कौड़ियों के भाव में लेने के बादजमीन बिक्री की राशि भी एक निजी बैंक में खाता खुलवाकर निकाल ली गई थी। भू स्वामी की मौत के बाद स्वजनों ने आरोप लगाया था कि फर्जी ऋण पुस्तिका के सहारे जमीन की खरीद-बिक्री की गई है। आरोप यह भी था कि जमीन का एक रुपये भी क्रेता ने नहीं दिया है। इन्होंने भू विक्रेता माखन को साजिश का शिकार बनाने के बाद शराब में जहर देने का आरोप लगाया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
मामले को सरगुजा कलेक्टर संजीव कुमार झा ने संज्ञान में लिया था और जांच के आदेश दिए थे। इधर पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज अजय कुमार यादव एवं पुलिस अधीक्षक अमित तुकाराम कांबले के मार्गदर्शन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ल, नगर पुलिस अधीक्षक अखिलेश कौशिक के नेतृत्व में मामले की जांच की गई तो सामने आया कि नौ फरवरी को माखन पिता लाली निवासी डिगमा के द्वारा एक लिखित शिकायत थाना गांधीनगर को दी गई कि उसकी जमीन खसरा नंबर 317/1 रकबा 0.39 हेक्टेयर को मुकेश मुण्डा, राहुल विश्वकर्मा, भोलू उर्फ विशाल मजुमदार तथा अन्य के द्वारा प्रार्थी को शराब के नशे में धुत कर बहला-फुसलाकर कुल रकबा में से 35 डिसमिल जमीन को किसी अन्य आदिवासी के नाम पर बिकवा दिए। इसके पैसे भी प्रार्थी को नहीं मिले। विक्रय पत्र में अंकित ऋण पुस्तिका का नंबर भी प्रार्थी का नहीं है। शिकायत की जांच करने में यह तथ्य सामने आया कि जमीन दलाल विशाल मजूमदार उर्फ भोलू यह कार्य सूर्य प्रकाश साहू निवासी दर्रीपारा के इशारे पर करता है। भोलू तथा उसके साथी सोभाजित मण्डल, दिनेश मण्डल, रीता मण्डल इत्यादि जमीन दलाली का कार्य करते हैं। प्रकरण में आवेदक की जमीन को कब्जा करने की नीयत से विशाल उर्फ भोलू के द्वारा अपने साथियों राहुल विश्वकर्मा, रीता मंडल, ललिता के द्वारा माखन को बहला-फुसलाकर तथा ललिता के साथ शादी का झांसा देकर, ललिता के नाम पर जमीन का कुछ हिस्सा राजिस्ट्री कराने राजी कर लिए। आदिवासी की जमीन होने के कारण जमीन की बिक्री हेतु सूर्य प्रकाश साहु द्वारा अपने नीचे काम करने वाले मुकेश मुण्डा के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करने को बोला गया। इसके पश्चात ललिता के द्वारा जमीन क्रेता मुकेश मुंडा को अपने भाई के रूप में आवेदक माखन को बताया गया तथा उसके नाम जमीन रजिस्ट्री करने बोला। जमीन की रजिस्ट्री हेतु दस्तावेज का निर्माण प्रकाश साहू के कहने पर भोलू, सोभाजित मण्डल तथा दिनेश मण्डल के द्वारा तैयार कराया गया। आवेदक माखन को संपूर्ण प्रक्रिया से दूर रखा गया। माखन अपनी जमीन बेचना नहीं चाहता था। क्योंकि उसके बेटों के बीच जमीन के बंटवारे का प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था, किंतु आरोपितों के द्वारा षड्यंत्र के तहत जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई। जमीन की राजिस्ट्री के लिये स्टांप का क्रय सोभाजित मंडल के द्वारा किया गया। रजिस्ट्री दिनांक को विवादित जमीन को महज सात लाख रुपये में खरीदा गया जबकि बजार भाव लगभग 70 लाख रुपये था। इसी बीच भोलू उर्फ विशाल, राहुल विश्वकर्मा, रीता मंडल और ललिता घरामी के द्वारा आवेदक के नाम एक खाता कैनरा बैंक में खोला गया। बैंक
का एटीएम और सीक्रेट पिन भोलु उर्फ विशाल अपने पास रखा। मुकेश मुण्डा द्वारा दिए गए चेक को माखन के खाते में इन्होंने जमा कराया, बाद में उसके एटीएम के माध्यम से रुपये को भोलू उर्फ विशाल निकालने लगा। निकाली गई राशि कुल लगभग 6 लाख रुपये थी, शेष रुपये उसके खाते में है। इस प्रकार उसकी जमीन को हथिया लिया गया और कोई राशि नहीं दी गई। आवेदक माखन की शिकायत आवेदन देने के उपरांत 10 फरवरी को मौत हो गई, जिसकी मर्ग जांच पृथक से की जा रही है। संपूर्ण मामले में अनावेदक भोलू उर्फ विशाल मजुमदार, राहुल विश्वकर्मा, सोभाजित मंडल, दिनेश मंडल, अनिल चटर्जी, मुकेश मुंडा, प्रकाश साहू, रीता मंडल, ललिता घरामी के द्वारा आवेदक माखन के साथ छल-कपट और धोखाधड़ी करते हुये कूटरचित ऋण पुस्तिका के माध्यम से उसकी 35 डिसमिल जमीन को सस्ते दाम पर किसी अन्य आदिवासी को सामने रख कर खरीदा जाना तथा बिक्री की राशि इनके द्वारा निकालकर उपयोग किया जाना पाए जाने थाना गांधीनगर में धारा 120 बी, 420, 467, 468, 471 भादवि पंजीबद्ध किया गया है। मामले में नौ आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया जा रहा है। कार्रवाई में निरीक्षक अलरिक लकड़ा, सरोज टोप्पो, उपनिरीक्षक सरफराज फिरदौसी, अनीता आयाम, ओपी यादव, सहायक उप निरीक्षक भूपेश सिंह, रविंद्र प्रताप सिंह, आरक्षक अमृत सिंह, प्रवीण सिंह, मंटू गुप्ता, समीनुल फिरदौसी, अमित विश्वकर्मा, बृजेश राय, अनिल सिंह, अनिल परिहार महिला आरक्षक मेविश ज्योत्सना, तिलोचिनी, भोली राजवाड़े की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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