राजेन्द्र ठाकुर (राजू) छ.ग.फ्रंटलाइन
बलरामपुर। कलेक्टर एवं नगर पालिका के अधिकारियों के प्रयास से बलरामपुर-रामानुजगंज जिला मुख्यालय में प्रदेश का पहला शहीद पार्क बना। बलरामपुर चौक से होकर गुजरने वाले लोगों की नजर जैसे ही पार्क पर पड़ेगी, उनके कदम एक पल के लिए ठिठक जाएंगे। पार्क में देश के लिए मर मिटने वाले शहीदों की लगी आदमकद प्रतिमा इनकी देश के लिए कुर्बानी की गाथा को स्मरण कराएगी। देश के इन वीर सपूतों को देखने के लिए शहीद पार्क में जनसैलाब उमड़ रहा है। वास्तव में ये शहीद जिस सम्मान के हकदार थे, इसे साकार किया है जिले के कलेक्टर विजय दयाराम के.ने। पूर्व में शहीदों को राष्ट्रीय पर्व के मौके पर याद किया जाता था, लेकिन बलरामपुर जिला मुख्यालय में बना यह शहीद पार्क हर दिन, हर पल देश के लिए मर मिटे जांबाजों की याद दिलाएगा और श्रद्धा से लोगों के सिर इनके समर्पण की गाथा को जानकर झुक जाएंगे। इनकी कुर्बानी की दास्तां युवा पीढिय़ों सहित सामान्य जनों में देश प्रेम की भावना जागृत करेगी।
स्थापित की गई इन वीर जांबाजों की प्रतिमा
0 ग्राम नीलकंठपुर में 12 अप्रैल 1961 को जन्मे स्व.महेश राम पैकरा छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 357 में आरक्षक के पद पर तैनात थे। 15 मार्च 2007 को रानी बोदली कैंप थाना कुटूरू जिला बीजापुर में नक्सलियों द्वारा पेट्रोल बम, हैंड गे्रनेड से हमला किया गया, जिसमें रानी बोदली कैंप में तैनात नवमी वाहनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल पटना के 16 जवान एवं 39 एसपीओ शहीद हो गए थे।
0 बलरामपुर जिले के चौकी गणेश मोड़ अंतर्गत ग्राम मगरलेटा पारा में 30 जुलाई 1980 को जन्मे स्व.अनिल खलखो आरक्षक क्रमांक 634, पांचवीं वाहनी (आर्मी) में पदस्थ थे। दो अक्टूबर 2007 को थाना मिस्तुर जिला बीजापुर से जिला बल एवं छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की पुलिस पार्टी नक्सल अभियान हेतु रवाना हुई थी। ग्राम फुलादी के पास नक्सलियों द्वारा किए गए बम विस्फोट की चपेट में आने से छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के आरक्षक अनिल खलखो शहीद हो गए थे।
0 राजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम ओकरा निवासी स्व.मसीह भूषण लकड़ा का जन्म 11 सितंबर 1958 को हुआ था। 12 अक्टूबर 2001 को पलामू जिले के पाकी थाना क्षेत्र के करमा ग्राम के पास लोहरसी रोड पर शासकीय कार्य निपटाकर थाना आते समय एमसीसीआइ उग्रवादियों ने बम एवं फायरिंग कर हमला कर दिया था। हमले को झेलते प्रा.आ.नि.(प्रशिक्षण) मसीह भूषण लकड़ा ने जवाबी कार्रवाई की। अंतिम दम तक लड़ते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। मरणोपरांत इन्हें 15 नवंबर 2001 को वीरता के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री ने पदक से अलंकृत किया।
0 बलरामपुर जिले के ग्राम-पीपरसोत निवासी, वर्तमान पता वार्ड क्रमांक 11 मिशन रोड बलरामपुर निवासी उप निरीक्षक जीडी 680020915 (सीआरपीएफ)112 स्व.नबोर कुजूर का जन्म 12 जुलाई 1949 को हुआ। वे केंद्रीय पुलिस बल की ई/112 वाहिनी लामडांग असम में पदस्थ थे। 18 जुलाई 2000 को उनकी पार्टी एनएचपीसी की स्कूल बस एवं अधिकारियों के वाहन की सुरक्षा के लिए आरओपी हेतु लामडाग पोस्ट से लगभग 1.75 किलोमीटर दूर निकली। इस दौरान पहाडिय़ों में पहले से भूमिगत हुए उग्रवादियों ने स्वचालित व अत्याधुनिक हथियारों से पार्टी पर अंधाधुंध फायरिंग कर हमला कर दिया, जिसमें बहादुर उप निरीक्षक नबोर कुजूर शहीद हो गए।
0 स्व.लाजरुस मिंज का जन्म 30 जून 1955 को ग्राम बास करचा, जिला-पलामू (झारखंड) में हुआ। वर्तमान में वार्ड क्रमांक-11 मिशन रोड बलरामपुर में इनका निवास है। वे आर्मी में आरक्षक एवं हवलदार (झारखंड) के पद पर पदस्थ थे। भारतीय सेना में बिहार रेजीमेंट की सातवीं बटालियन में 30 जून 1973 में भर्ती हुए। वे श्रीलंका में उग्रवादियों के साथ वीरता एवं साहस के साथ लड़ते हुए 24 जून 1989 का वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी वीरता एवं बलिदान पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा (मरणोपरांत) सन 1990 में सेना मेडल से उन्हें अलंकृत किया।
0 स्व.रामसाय राम का जन्म 29 सितंबर 1958 को सरगुजा जिले के ग्राम करकली में हुआ था, जो आर्मी में आरक्षक के पद पर पदस्थ थे। नायक रामसहाय राम भारतीय सेना में महार रेजीमेंट की 15वीं बटालियन में 12 नवंबर 1976 में भर्ती हुए। वे सियाचिन ग्लेशियर (विश्व की सबसे ऊंचाई पर स्थित युद्ध भूमि) में दुश्मनों से अदम्य साहस एवं वीरता से लोहा लेते हुए ग्लेशियर में हिम स्खलन से बनी दौरान दरार में गिर गए। अत्यधिक ठंड एवं विषम परिस्थितियों के कारण उनके पार्थिव शरीर को निकाला नहीं जा सका और उन्हें लापता बता मृत घोषित किया गया। अदम्य शौर्य, निष्ठा एवं बलिदान को देखते हुए उनका नाम राष्ट्रपति को वीरता पदक के लिए प्रेषित कर दस्तावेजों में उल्लेखित किया गया।

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