पुरातात्विक धरोहरों को सहेजने जिले में संग्रहालय की आवश्यकता : डॉ विनोद पांडेय

मनेंन्द्रगढ़ (एमसीबी) । छत्तीसगढ़ शासन संचनालय पुरातत्व व संस्कृति विभाग रायपुर के तत्वावधान में “जिला पुरातत्व संघो के निर्माण एवं कार्य विधियाॅ ” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य के विभिन्न जिलों में जिला पुरातात्विक संघ के गठन तथा उनके कार्य एंव दायित्व तथा पुरातत्व धरोहरों के संरक्षण में उनकी भूमिका स्पष्ट करना था, इस कार्यशाला में पुरातत्व संग्रहालय प्रबंधन एवं विरासत संरक्षण में जुड़े विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्रों में जिला पुरातत्व संघ के सदस्यों को प्रशिक्षित करना था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर आर एन विश्वकर्मा प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ तथा राहुल सिंह प्रमुख, धरोहर परियोजना बायोडायवर्सिटी एक्सप्लोरेशन एंड रिसर्च, पुरातत्व विभाग के उपसंचालक पी सी पारख थे । जिले के पुरातत्व संघ के समन्यक सदस्य एवं नोडल अधिकारी डॉ विनोद पांडेय ने परिचर्चा में भाग लेते हुए मनेंद्रगढ़-चिरमिरी -भरतपुर जिले के पुरातत्व संघ का गठन एवं पुरातात्विक स्थलों घाघरा का शिव मंदिर, सीतामढ़ी हरचौका, धवलपुर की गढी, छिपछिपी में विष्णु की प्रतिमा, रॉक पेंटिंग तथा सती मंदिर बरतुंगा के विस्थापन के बारे में जिला प्रशासन के द्वारा इन स्थलों को संरक्षित करने के लिए किए जा रहे प्रयास के बारे में जानकारी दी साथ ही इसके महत्व के बारे में बताया। अंत में विभाग द्वारा पुरातात्विक नियमों के बारे में सभी सदस्यों को जानकारी दी गई । कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रभात कुमार सिंह, डॉ मोहन साहू, डॉ विनय तिवारी, वृषोत्तम साहू, प्रवीण तिर्की, अमर भारद्वाज तथा छत्तीसगढ़ के पच्चीस जिलों से आए हुए पुरातत्व संघ के दो-दो सदस्य उपस्थित रहे।

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