कांजी हाउस कबाड़ में तब्दील हुआ, घुमंतू पशुओं के लिए कोई योजना नहीं

प्रतापपुर। सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े ने इस शहर वासियों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है, वहीं नगर पंचायत कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता निभा रहा है। यही कारण है कि इन दिनों नगर पंचायत प्रतापपुर शहर की सभी प्रमुख सड़कें और चौक-चौराहों में बड़ी संख्या में मवेशियों का जमावड़ा रहता है। इससे दोपहिया वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नगर पंचायत के पास इसका कोई कारगर समाधान नहीं है।
छत्तीसगढ़ शासन ने कुछ वर्ष पूर्व रोका-छेका नाम से अभियान शुरू किया था। घुमंतू मवेशियों को पकड़कर शहरी गोठानों में रखने की योजना बनाई थी, किंतु यह योजना भी खटाई में नजर आ रही है। शहर के मुख्य मार्ग के हर चौराहे पर जहां भीड़-भाड़ की स्थिति रहती है, वहां बड़ी संख्या में मवेशी जमा रहते हैं। शहर के प्रमुख स्थलों पर भी बड़ी तादाद में मवेशियों का जमाव देखने को मिल जाएगा। नगर पंचायत के अधिकारी सब कुछ देखने के बाद भी इन मवेशियों की धरपकड़ को लेकर गंभीर नहीं है। हाल में कलेक्टर सूरजपुर ने शहर में विचरण कर रहे मवेशियों को पकडऩे का आदेश दिया था। कलेक्टर के आदेश के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। परिणाम स्वरूप एक बार फिर शहर में मवेशियों की भीड़ लग गई है, इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। हर रोज किसी न किसी मार्ग पर दोपहिया सवार घायल हो रहे हैं, जो व्यापारियों के लिए मुसीबत बन गई है।
मवेशी स्वामियों पर कार्रवाई की जरूरत
शहर में मवेशियों को स्वच्छंद छोडऩे वालों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होने से ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है। शहर के पशुपालक दूध निकालने के बाद गायों को स्वच्छंद छोड़ देते हैं। ऐसे मवेशी पालकों की पहचान कर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जरूरत है। नगर पंचायत ने मवेशियों को स्वच्छंद छोडऩे पर जुर्माने का प्रावधान किया है, इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।
देर रात मवेशियों को छोड़ रहे
शहर में इन दिनों मवेशी मालिकों द्वारा नई परिपाटी की शुरुआत की गई है। उन्हें पता है कि रात में स्वच्छंद विचरण करने वाले मवेशियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, इसलिए रात 10 बजे के बाद मवेशियों को खुला छोड़ दिया जाता है। बरसात के सीजन में बैठने के लिए मवेशी सूखा स्थान खोजते हैं। डामरीकृत सड़कों के अलावा दुकानों के आसपास मवेशी सारी रात बैठे रहते हैं, जो दुर्घटना का कारण बनते हैं।

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