अंबिकापुर। पुलिस ने दोहरे हत्याकांड के आरोपित को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड में भेज दिया है। रविवार की रात जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपित जिले की सरहद को छोड़कर भागने के प्रयास में था। पुलिस ने साइबर तकनीकि की मदद से अपराधी का पता लगाया और घेराबंदी कर उसे जशपुर जाते समय घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। विवेचना की कमान संभाली पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता के निर्देशन में घटनास्थल में मिले महत्वपूर्ण सुराग एवं स्वजनों के संदेह के आधार पर पुलिस हत्यारोपी तक पहुंचने में सफल हुई। आरोपित ने पति-पत्नी की जघन्य हत्या व मासूम बच्चे पर प्राणघातक हमला करना पूछताछ में स्वीकार किया है। आरोपित महिला से विवाह के बाद संबंध टूटने की वजह से रंजिश रखता था।
पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि तीन अक्टूबर की सुबह आठ बजे बंधानो देवी, पुलिस चौकी मणिपुर में सूचना दी थी कि उसका छोटा पुत्र, बहू और नाती अपने कमरे में सोए थे। अलसुबह उसकी नींद खुली तो दरवाजा बाहर से बंद था। किसी तरह वह दरवाजा खोलकर बाहर गई तो उसके पुत्र का मोटरसाइकिल घर में नहीं था। कमरे में गई तो उसका बेटा और नाती बेहोश पड़े थे, खून निकल रहा था, बहू घर में नहीं थी। मामले की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस विवेचना में लगी थी, इसी दौरान उदयपुर के मुटकी जंगल में एक महिला की लाश मिलने की सूचना प्राप्त हुई। ऐसे में पुलिस का संदेह ग्राम थोर में हुई हत्या और गायब महिला की ओर गया और दोहरे हत्याकांड को संज्ञान में लेकर पुलिस अग्रिम विवेचना में जुटी। सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस आरोपित तक पहुंचने में सफल हो गई। कार्रवाई में कोतवाली प्रभारी अंबिकापुर रुपेश नारंग, थाना प्रभारी उदयपुर धीरेन्द्रनाथ दुबे, मणिपुर चौकी प्रभारी सरफराज फिरदौसी, सहायक उपनिरीक्षक भूपेश सिंह, प्रभात सिंह, विवेक पांडेय, प्रधान आरक्षक विपिन तिवारी, सतीष सिंह, मनोज लकड़ा, आरक्षक सत्येंद्र दुबे, अतुल शर्मा, सुरेश गुप्ता, आशीष चौहान, निर्मल भगत, इम्तियाज, अमित विश्वकर्मा, बृजेश राय, सीनू फिरदौसी, अतुल सिंह, विकास सिंह एवं साइबर सेल से प्रधान आरक्षक भोजराज पासवान, सुधीर सिंह, आरक्षक रमेश राजवाड़े, विकास मिश्रा, जितेश साहू, अशोक यादव, रुपेश महंत, सैनिक संतोष पाठक शामिल रहे।
एसपी ने संभाली विवेचना की कमान
प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज अजय यादव के मार्गदर्शन में पुलिस अधीक्षक सरगुजा भावना गुप्ता ने आरोपित तक पहुंचने स्वयं कमान संभाली थी। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला, नगर पुलिस अधीक्षक अखिलेश कौशिक के नेतृत्व में चार थाना प्रभारियों की विशेष टीम गठित कर घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने एवं स्वजनों द्वारा दिए गए बयान के आधार पर मामले के संदेही की पहचान कर पकडऩे का निर्देश दिया था।
मृतक की मोटरसाइकिल बरामद
स्वजनों से पूछताछ में सामने आए तथ्य के आधार पर पुलिस टीम जब लखनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कोरजा पहुंची तो वहां संदेही के द्वारा घर में छिपाकर रखा गया पल्सर वाहन मिला, जो मृतक आशाराम का था। पुलिस ने मोटरसाइकिल को बरामद कर संदेही की तलाश शुरू की तो पल-पल में उसका लोकेशन बदल रहा था। लेकिन विशेष टीम के प्रयास से संदेही को जशपुर भागते समय बस से पकडऩे में सफलता मिल गई।
आरोपित ने पुलिस को बताया
आरोपित जग्गू उर्फ राकेश निवासी कोरजा थाना लखनपुर ने घटना के संबंध में पूछताछ करने पर बताया गया कि मृत महिला पहले उसकी पत्नी थी, जो उसके साथ में ना रहकर ग्राम थोर निवासी युवक के साथ पिछले दो साल से रह रही थी, जिस कारण वह इनसे रंजिश रखता था। उसने पहले युवती के पति को खूंटा से मारकर हत्या करना फिर बच्चे को भी खूंटा से मारना बताया। बच्चे का रायपुर में इलाज चल रहा है। बाद में आरोपित महिला को उदयपुर के मुरता जंगल ले जाकर दुष्कर्म किया, बाद में हत्या कर शव को पेड़ से टांग दिया। घटना पश्चात आरोपित मृतक की मोटरसाइकिल को अपने घर में छिपाकर अंबिकापुर आया और बस से जशपुर भाग रहा था, इसी दौरान पकड़ा गया।
अकेले दिया वारदात को अंजाम
आरोपित जग्गू उर्फ राकेश राजवाड़े सेंट्रिंग का काम करता है, जिसने पुलिस को अकेले पूरे घटनाक्रम को अंजाम देने की जानकारी दी है। उसने बताया कि घटना की रात लगभग 10 बजे वह बकिरमा की ओर से पैदल आया और मृतक आशाराम को आवाज लगाया। दरवाजा खुलते ही वह अंदर गया और मवेशी बांधने वाले खूंटा से हमला कर उसे मौत की नींद सुला दिया। इसके बाद बच्चे पर हमला किया, दोनों के अचेत होने के बाद वह महिला को डरा-धमकाकर मृतक की मोटरसाइकिल में बैठाकर साथ ले गया था। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपित आदतन बदमाश प्रवृत्ति का है। मारपीट करने के कारण विवाह के बाद युवती उसे छोड़कर आशाराम के साथ रह रही थी।

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