बलरामपुर। जिला मुख्यालय में नाबालिग बच्चेे, दोपहिया वाहन में तीन सवारी करते नजर आ रहे हैं। कम उम्र के साथ मोटरसाइकिल की तेज गति देखने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि अपने साथ ही मार्ग से आने-जाने वालों का जान जोखिम में डाल रहे हैं। वास्तव में इनकी रफ्तार ऐसी रहती है कि पैदल ही अन्य वाहन चालक अगर गलती से इनके इर्द-गिर्द आ गए तो बच पाना मुश्किल है। जिले में लगातार यातायात विभाग लोगों से यातायात नियमों का पालन करने आग्रह करते नजर आता है लेकिन लापरवाह बच्चे अपनी बचकानी हरकतों के आगे किसी बड़ी दुर्घटना को मूर्तरूप दे सकते हैं, इसके लिए देखा जाए तो अभिभावक भी जिम्मेदार हैं, जो बच्चों की जिद के आगे या स्वस्फूर्त सुविधा के नाम पर वाहन इन्हें थमा रहे हैं। छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइन ने इसे मुद्दा मान लोगों से चर्चा की तो उन्होंने नाबालिगों के वाहन की रफ्तार एवं तीन सवारी लेकर फर्राटे भरने की जिम्मेदारी अभिभावक पर मढ़ते हुए कहा कि पढऩे वाले बच्चों के हाथ में मोटरसाइकिल की चाभी थमाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। मोटरसाइकिल या स्कूटी बच्चों को थमाते समय बच्चे की वाहन चालन की योग्यता को परखना चाहिए। साथ ही किसी प्रकार की दुर्घटना की स्थिति में उसका परिणाम क्या होगा, यह सोच अभिभावकों में बननी चाहिए।
विद्यालय प्रबंधन भी हो जागरूक
शहर के गणमान्यजनों का मानना है कि विद्यालय में पढऩे वाले बच्चे मोटरसाइकिल, स्कूटी में न आएं, इसका ध्यान स्कूल प्रबंधन को भी देना होगा। अभिभावकों को स्कूल बुलाकर सख्त हिदायत दी जाए कि अगर बच्चे को वे दोपहिया वाहन से स्कूल भेजते हैं तो इसके जिम्मेदार वे स्वयं होंगे। इसके बाद भी बात नहीं बनती है तो स्कूल में मोटरसाइकिल व स्कूटी लेकर आने वाले बच्चों की जानकारी यातायात पुलिस को देकर चालानी कार्रवाई की जाए और वाहन की चाभी अभिभावक को बुलाकर उनके हाथों में सख्त हिदायत के साथ सौंपी जाए। इसके बाद भी अभिभावक बच्चों को दोपहिया वाहन से भेजते हैं, तो वाहन को जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई कर मामला न्यायालय के सुपुर्द किया जाए।
बयान-
लगातार बच्चों एवं स्वजनों को समझाइश देने के साथ कार्रवाई भी की जा रही है, ताकि नाबालिग के हाथ में अभिभावक किसी वाहन की चाभी ना सौंपें। स्कूल में बच्चों के समक्ष यातायात के नियमों के प्रति जागरूकता देने का भी प्रयास कर रही है।
राजेंद्र साहू, यातायात प्रभारी

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