संसदीय सचिव ने लगवाया कोविड वैकशीन का दूसरा डोज

संसदीय सचिव अम्बिका सिंहदेव ने क्षेत्रवासियों से की टीका लगवाने की अपील

मनेंद्रगढ़ । कोविड वैक्सीन कोरोना के विरुद्ध एक सुरक्षा कवच है तथा जब तक समाज का प्रत्येक नागरिक इस कवच को धारण नहीं करता तब तक हमारा समाज सुरक्षित नहीं है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपनी स्वेच्छानुसार कोविड वैक्सीन को लगवाना चाहिए, ताकि इस महामारी को जड़ से खत्म किया जा सके। इसी विचार के साथ संसदीय सचिव व बैकुंठपुर विधायक अम्बिका सिंहदेव ने शुक्रवार को कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाई। वैकशीन की दूसरी डोज लगवाने के बाद मीडिया के माध्यम से अपील करते हुए संसदीय सचिव अम्बिका सिंहदेव ने कहा कि मैंने खुद टीका लगवाया है और अब मैं खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रही हूं। महामारी से बचने का यही एक मात्र उपाय है। जल्द सेंटर पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराकर टीका जरूर लगवाएं। उन्होंने कहा कि फ्री में सरकार द्वारा लोगों का टीकाकरण किया जा रहा है। इसका लाभ सभी को लेना चाहिए। यह वैकसीन पूरी तरह से सुरक्षित है।
संसदीय सचिव व बैकुंठपुर के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों की साफ-सफाई संबंधी अनुशासन का कड़ाई के साथ स्वयं भी पालन करें और दूसरों से भी करवाएं। सैनेटाइजर या साबुन से बार-बार अपने हाथ धोते रहें। सामाजिक-आयोजनों में भी न्यूनतम उपस्थिति सुनिश्चित करें, ताकि वायरस फिर फैल न पाए।

टीका ही एकमात्र हथियार

संसदीय सचिव अम्बिका सिंहदेव ने कहा कि टीका को लेकर किसी के भी मन में डर या आशंका नहीं होनी चाहिए। क्योंकि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए टीका ही एकमात्र हथियार है। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के मार्गदर्शन में सभी शासकीय अस्पतालों में टीका निःशुल्क लगाया जा रहा है। सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में इसकी व्यवस्था की गई है। हम संपूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य जितनी तेजी से हासिल करेंगे, उतनी ही जल्दी कोरोना से सुरक्षित हो सकेंगे।

कोविड अनुकूल व्यवहार को छोड़ना नहीं है

संसदीय सचिव अम्बिका सिंहदेव ने कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर अब लगभग शांत हो चुकी है। राज्य में आर्थिक गतिविधियां फिर से तेज हो रही हैं। इन सबके बीच हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना का प्रकोप कम जरूर हुआ है, पर खत्म नहीं हुआ है। हमें कोविड अनुकूल व्यवहार को छोड़ना नहीं है। यह समय और अधिक सतर्क रहकर अपनी जिम्मेदारियां वहन करने का है।
दूसरी लहर में हमने बहुत कुछ खोया है। आर्थिक नुकसान तो हुआ ही, बहुत से प्रियजनों को भी कोरोना ने हमसे छीन लिया। यदि हम अब भी सचेत नहीं हुए तो तीसरी लहर को रोका नहीं जा सकेगा।

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