0 दिल्ली में मिला 3 वर्ष पूर्व लापता हुआ बालक


चंचलेश श्रीवास्तव
सूरजपुर। एक माँ के लिए उसकी संतान क्या मायने रखती है यह उससे बेहतर भला और कौन जान सकता है। पुत्र चाहे जितना भी बड़ा क्यो न हो वह हमेशा माँ की आंखों का वही तारा होता है जो बाल्यवस्था में था। हर माँ अपने पुत्र को हर हाल में अपनी नजरो के सामने देखना चाहती है। अगर एक पल के लिए भी वह उससे ओझल होता है तो माँ की ममता भरी नजर उसे उस पल उस वक्त तक ढूंढती है जब तक की वह उसकी आंखों के सामने ना आ जाए और जब जिगर का टुकड़ा सामने होता है उस वक्त मां के दिल की खुशी व आंखों में जो चमक होती है। उसका अंदाजा लगा पाना नामुमकिन है। जिला प्रशासन के संवेदनशील प्रयास ने एक ऐसी ही  माँ के चेहरे पर खुशी व आंखों में वह चमक दी है जो उस माँ के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। जिसकी आंखे तीन वर्षों से अपने लापता पुत्र की राह तकते तकते पथरा सी गई थी। अचानक लापता बच्चे के मिलने से  गांव के उन लोगो मे भी  खुशी माहौल है। जिन लोगो ने उस माँ की तीन वर्षों की तड़प देखी है। कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के मार्गदर्शन में तथा पुलिस अधीक्षक  राजेश कुकरेजा एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रबेस सिंह सिसोदिया महिला बाल विकास विभाग के निर्देशन में यह सूचना प्राप्त होने पर की सूरजपुर का एक बालक नई दिल्ली में है जो कि बोल व सुन नहीं पाता है। 
0 परिजनों को खोजना थी चुनौती
 जानकारी अनुसार बालक के परिजनों को खोजना एक चुनौती थी। इस कार्य हेतु जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा चाईल्ड लाइन व आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को इस तरह के बालक जो बोल व सुन नही सकता के माता-पिता की खोज करने हेतु निर्देशित किया गया।चाईल्ड लाइन द्वारा पतासाजी करने पर सिलफिली के एक गांव के गोड़ परिवार से 3 साल पूर्व एक ऐसे ही बालक के लापता होने की सूचना मिली। जिला कार्यक्रम अधिकारी चंद्रबेश सिंह सिसोदिया, सरंक्षण अधिकारी प्रियंका सिंह व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ उस गांव माता-पिता से मिलने गए। उनके बातचीत से बच्चे का हुलिया मिलान हेतु वीडियो कॉल के द्वारा उस बच्चे को माता-पिता व उसके छोटे भाई बहनों से बात कराने पर बच्चे द्वारा अपनी छोटी बहन को पहचाना गया। इस दौरान माता-पिता, भाई बहन सभी अपने बच्चे को 3 साल बाद सकुशल देखकर अत्यंत भावुक हो गए। सांकेतिक भाषा के द्वारा उसके पुष्टि करने पर बच्चे का गृह सत्यापन रिपोर्ट डीसीपीओ  मनोज जायसवाल द्वारा नई दिल्ली भेज दिया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा पुलिस कप्तान राजेश कुकरेजा से बात कर एक टीम गठन हेतु सहयोग मांगा गया। तत्काल उनके द्वारा आई जी कार्यालय सरगुजा से अनुमति प्राप्त कर एक पुलिस अधिकारी को टीम के साथ समन्वय स्थापित करने हेतु निर्देशित किया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा नई दिल्ली की बाल गृह अधिकारी व बाल कल्याण समिति के चेयरमेन से निन्तर सम्पर्क कर अपनी टीम को मार्गदर्शन प्रदान किया।
   शुक्रवार को टीम के सकुशल वापिस आने पर सभी सदस्यों का कोविड टेस्ट होने के बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति सुरजपुर को प्रस्तुत कर उसके माता-पिता को सुपुर्द किया गया। गृह सत्यापन पर बालक के माता-पिता द्वारा अवगत कराया गया की बालक जय (परिवर्तित नाम) तीन वर्ष पहले कहीं चला गया था जिसका आसपास पता किया गया पर पता नहीं चल पाया था। दिल्ली से प्राप्त सूचना के आधार पर तत्काल जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा बालक का गृह सत्यापन मनोज जायसवाल जिला बाल संरक्षण अधिकारी को करने हेतु निर्देशित किया गया। बालक का तत्काल गृह सत्यापन  रिपोर्ट तैयार कर नई दिल्ली प्रेषित किया गया। पुलिस अधीक्षक से समन्वय कर दल गठित कर संयुक्त टीम जिला बाल संरक्षण इकाई से परामर्शदाता जैनेन्द्र दुबे चाईल्ड लाईन से केंद्र समन्वयक कार्तिक मजूमदार, पुलिस स्टाफ थाना जयनगर से सिदार को रवाना किया गया। संयुक्त दल द्वारा नई दिल्ली जाकर बालक जय  को लाया गया एवं बाल कल्याण समिति सूरजपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति द्वारा बालक को उनके माता पिता को सुपुर्द किया गया। बालक एव उसकी माता को जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा उनके गृहग्राम में सुरक्षित पहुंचाया गया।
0 गांव में खुशी का माहौल
बालक के घर पहुंचते ही परिवार के अन्य सदस्य, पास पड़ोस के लोग बालक से मिलने आए और सभी बहुत खुश हुये। सार्थक प्रयास से तीन वर्ष पहले गुम हुए बालक को उसके माता-पिता से मिलाया गया। नई दिल्ली की टीम, जिला बाल संरक्षण इकाई म0 बा0वि0, चाईल्डलाइन, पुलिस टीम का विशेष योगदान रहा।

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