अम्बिकेश गुप्ता

कुसमी। छत्तीसगढ़ राज्य के बलरामपुर-रामानुजगंज जिला अंतर्गत सामरी पाठ के ग्राम पंचायत जमीरा के विभिन्न पारा व टोला में प्रस्तावित बॉक्साइट खदान के संदर्भ में जमीरा शासकीय माध्यमिक स्कूल के प्रांगण में पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजन गुरुवार 22 दिसम्बर को किया गया. जिसका विरोध करते हुवें ग्रामीणों ने प्रशासन पर बड़ा आरोप लगाया है. ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें जनसुनवाई की जानकारी नहीं दी गई. तथा किस बारे में जनसुनवाई की जा रहीं हैं इस पर खुलकर किसी भी विषय को नहीं रखा गया हैं. ग्रामीणों द्वारा बातो को रखने पर माइक बंद कर बातों व मांगो को अनसुना किया गया. भूस्वामी खेती नुमा जमीन को देने से इंकार कर बक्साईट खदान खोले जाने का विरोध कर रहें हैं।

उल्लेखनीय हैं की बलरामपुर रामानुजगंज जिला के कुसमी विकास खंड अंतर्गत आदिवासी इलाका ग्राम पंचायत जमीरा के विभिन्न टोला – मोहल्ले में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम की प्रस्तावित बॉक्साइट खनन परियोजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान सर्वाधिक महिलाओ व पुरुष सहित युवाओं ने एकाएक विरोध शुरू कर दिया. कई भूस्वामीयों ने अपनी जमीन नहीं देने की रट लगाते हुवें जम कर नारेबाजी की. जिन्हे भारी मात्रा में तैनात की गई बलरामपुर पुलिस ने समझाइस देते हुवें शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की.

सीएमडीसी ने सामरी तहसील में 115 हेक्टेयर भूमि पर 10 लाख टन प्रतिवर्ष बॉक्साइट खनन के लिए जन सुनवाई का बिना आह्वान किये कागजी कोरम पूरा करने ग्राम पंचायत के चुनिंदा लोगों को बुलाकर कर लिया. तथा कई भूस्वामियों को इस बात की जानकारी साझा नहीं की गईं. और न ही प्रचार-प्रसार कराया गया. इसकी जानकारी जैसे ही भूस्वामियों को हुई वे जनसुनवाई में उपस्थित होकर अपनी बातों को रखने लगे. इस बिच उनकी बातों को नजरअंदाज करते हुवें माइक बंद कर दी गईं. जनसुनवाई में महज एक घंटे ही ग्रामीणों को अपनी बातों को पेश कर सुनियोजित तरीके से इस जनसुनवाई को समाप्त कर फर्जी सहमति दर्ज कर पंडाल में उपस्थित प्रसासनिक अमला की टीम उठ कर किनारे हट गईं. जबकि नाराज ग्रामीण अपनी बातों को पेश करने की गुहार लगाते रहें. फिर भी उन्हें बातों को रखने का मौका नहीं दिया गया.

स्थानीय युवाओं ने “छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइन” को जानकारी देते हुवें बताया हैं की जबरन दबाव बनाकर तथा बहला फुसलाकर सरपंच से प्रस्ताव में हस्ताक्षर कराया गया हैं. कई पंचो का भी फर्जी हस्ताक्षर कराया गया हैं. तथा प्रशासन ने दस्तावेज देने से मना कर दिया. उनकी आवाज को दबाने के लिए बार-बार माइक को बंद कर दिया जा रहा था. जिससे ग्रामीणों ने हंगामा खड़ा कर दिया. ग्रामीणों के हंगामे के बीच उपस्थित अधिकारियों ने जनसुनवाई समाप्त कर दिया. लगभग आधे घंटे तक विरोध में नारे लगते रहें. तथा जिनका भूमि नहीं हैं वैसे कुछ लोग जो रोजगार चाहते हैं वे सहमति देते हुवें नारे लगा रहें थें. जिनके लिए खाने में मांसाहारी भोजन की व्यवस्था कर उन्हें सीएमडीसी की पहुंची टीम द्वारा बढ़ावा दिया जा रहा हैं.

जन सुनवाई में कार्यक्रम में बलरामपुर अपर कलेक्टर एसएस पैकरा, कुसमी एसडीएम चेतन साहू, सीएमडीसी महाप्रबंधक रायपुर उपेंद्र कुमार पाण्डेय, क्षेत्रीय अधिकारी पर्यावरण संरक्षक मंडल अंबिकापुर प्रकाश रावड़े, मेसर्स छत्तीसगढ़ मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन डायरेक्टर प्रेम सिंह यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुशील नायक , एसडीओपी डी के सिंह, तहसीलदार उमा सिंह पैकरा , सीएमडीसी के प्रबंधक कर्मचारी सहित जिला पंचायत सदस्य अंकुश सिंह, सरपंच , उपसरपंच, संतोष इंदिवार सहित भारी संख्या में ग्रामीण जन, युवा, महिला तथा सुरक्षा कई दृस्टि से भारी संख्या में कुसमी थाना प्रभारी सुनील केरकेट्टा, सामरी थाना प्रभारी फरदीनंद कुजूर दल-बल सहित उपस्थित थें।

प्रशासन ने आपत्ति व सहमति किया दर्ज

इस जनसुनवाई मे पहुचे कुसमी एसडीएम चेतन साहू से पूछे जाने पर बताया गया की हमारे द्वारा आपत्ति व सहमति दर्ज कर सीडीएमसी के आरो को भेज दिया गया हैं. वहीं सीएमडीसी की टीम ने कहा की ग्रामीणों की आपत्तियों का निराकरण भी किया गया है. जो पंचायत को कुछ दिन बाद भेज दिया जायेगा. इसे सार्वजनिक नहीं कर सकते. साथ ही प्रभावित लोगों का सूची मांगे जाने पर कहा की इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.

जन सुनवाई कार्यक्रम में सीएमडीसी टीम के द्वारा मिडिया में बयान दिया गया की हम सभी जनता के हित को ध्यान में रखकर सभी नियम शर्त का पालन कर हमारे द्वारा खदान खोली जाएगी. जबकि ग्रामीणों ने सभी नियमों को ताक पर रखकर खादान खोले जाने का प्रकिया केवल कागज में कोरम पूरा करने का आरोप प्रसाशन पर लगाया हैं.

अशिक्षित होने का फायदा उठाकर लोगों को अपने झांसा में फ़साने की तैयारी

इलाके में शिक्षा का आभाव हैं प्रभावित कई भूस्वामी कम पढ़े लिखें हैं जो अधिकतर आदिवासी समुदाय से आते हैं. जिन्हें अशिक्षित होने का फायदा उठाकर अपने झांसा में फ़साने की तैयारी सीएमडीसी की टीम द्वारा कराया जा रहा हैं. उक्त मामले में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुवें गाँव के ही कुछ युवाओं ने बताया की सहमति देने का नारा लगाने वाले चुनिंदा लोगों को अव्वल दर्जे का नौकरी देने का प्रलोभन दिया गया हैं वैसे लोग प्रभावित भूस्वामियों को तथा भोले-भाले आदिवासी समुदाय के लोगों को बहलाने में लग गये हैं.

हम विकास के बाधक नही लेकिन गरीब के पेट मे लात मारकर व हक छीन कर किये जाने वाला विकास नहीं चाहिए – अंकुश सिंह

बलरामपुर जिला पंचायत सदस्य अंकुश सिंह भी ग्रामीणों के बुलाये जाने पर जनसुनवाई स्थल पहुँचे थें जिन्होंने ग्रामीणों के साथ उनकी बातों को पहुँची टीम के समक्ष रखी किन्तु उनके भी बातों को दरकिनार कर दिया गया. अंकुश सिंह ने खुले मंच पर उपस्थित मीडिया को ब्यान जारी करते हुवे कहा जनता नाम की चीज हैं नही यहा शासन-प्रशासन के आदमी बैठें थे. जो उनको बोलना सुनना था लिख कर आ गए थें. गाव के लोग मेरे साथ खड़े हैं जनता की बात सुनी ही नही गईं हैं. शासन-प्रशासन डंडा चलाकर खदान खुलवाने के पक्ष में हैं. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की बात को सुनकर गाव की विकास मुद्दे लिखित रूप में दिया जाए. और गाव के पंचायत के माध्यम से एक समिति बनाई जाए. अगर समिति हर व्यक्ति के विचार पर सहमति देती हैं. तब यहाँ आगे का योजना बढ़ाया जाए. अन्यथा सभी विरोध करेंगे. हम विकास के बाधक नही हैं लेकिन वह विकास किसी गरीब के पेट मे लात मारकर, किसी गरीब का हक छीन कर होगा तो हमे इस तरह का विकास नहीं चाहिए.

कलेक्टर व विधायक की उपस्थिति नहीं होने पर ग्रामीणों ने उठाया आवाज

एक घंटे में ही कोरम पूरा कर खादान खोले जाने को लेकर हुवे जनसुनवाई को असफल मानते हुवे ग्रामीणों ने सरकार को अगाह करते हुवे कहा हैं कि जनता के साथ खिलवाड़ मत कीजिये. जिन-भोले भाले आदिवासीयों का वोट लेकर सत्ता में आए थें उनको ठगना बन्द कीजिये. ग्रामीणों ने अपनी बातों को कलेक्टर व विधायक के समक्ष रखने की मंशा बनाई थीं. दोनों के अनुपस्थिति को लेकर कई तरह का सवाल ग्रामीणों के बीच उठा हैं. इसे लेकर एक भाजपा के एक जनप्रतिनिधि ने “छत्तीसगढ़ फ्रंटलाइन” को बयान दिया हैं कि कलेक्टर व विधायक को डर था. इसलिए वे उपस्थित नहीं थें. जिस हिसाब से योजना को लेकर जनसुनवाई की गई. वह सिर्फ अपनी बनी-बनाई योजना को सफल कराने बैठे थें. इसमें विरोध के स्वर उठाना निश्चित था. जिसके डर से कलेक्टर व विधायक नहीं उपस्थित नहीं थें. जबकि विधायक क्षेत्र में ही उपस्थित होकर जनसुनवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम को छोड़कर अन्य कार्यक्रमों में शामिल थें. वहीं सामरी विधायक से मामलें में संपर्क करना चाहा गया पर संपर्क नहीं हो सका.

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