दस किलो वजनी गोला लिए डेढ़ दशक से पीड़ा झेल रही थी महिला
गले की हड्डी टूटने का था खतरा, मेडिकल कॉलेज अस्पताल में निश्शुल्क ऑपरेशन

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सर्जरी कर महिला के गले से डॉक्टरों ने लगभग दस किलो वजनी ट्यूमर निकाला। महिला डेढ़ दशक से गले के थायराइड से पीडि़त थी। थायरायड बड़ा आकार ले लिया था, जिससे उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी और गले की हड्डी टूटने का खतरा था। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नाक-कान व गला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.बीआर सिंह ने जांच व उपचार के बाद महिला का ऑपरेशन किया, जिसस उसकी जान बच गई। ऑपरेशन के बाद महिला पूरी तरह से स्वस्थ है।
जानकारी के मुताबिक सूरजपुर जिले के ग्राम सरना की 54 वर्षीय पार्वती अगरिया 15 वर्षों से गले के थायराइड बीमारी की पीड़ा झेल रही थी। थायराइड धीरे-धीरे बढ़ते गया और ट्यूमर का रूप ले लिया। इसका वजन इतना बढ़ गया कि महिला की परेशानी बढ़ गई, उसे सांस लेेने में परेशानी हो रही थी। तकलीफ देख स्वजन उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लेकर पहुंचे। यहां नाक-कान व गला विभाग के डॉ.बीआर सिंह ने जांच किया तो पता चला कि थायराइड का वजन और बढऩे पर महिला की जान जा सकती है। उन्होंने स्वजनों से ऑपरेशन कराने के लिए तैयार रहने कहा और 23 नवंबर को चिकित्सकों की टीम ने ऑपरेशन किया। गले के पास थायराइड होने के कारण सर्जरी काफी जटिल थी। दो घंटे से अधिक चले ऑपरेशन के दौरान महिला के गले से वजनी गोला निकाला गया। ऑपरेशन में सर्जन डॉ.उषा सहायक प्राध्यापक, एनेस्थिसिया से डॉ. दीपा व डॉ.शिवानी शामिल रहे।
मरीज को किया गया डिस्चार्ज
नाक-कान व गला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.बीआर सिंह ने बताया मरीज की स्थिति ऑपरेशन के बाद ठीक है, उसे स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। गले का थायराइड होने के ऑपरेशन जटिल था। निजी अस्पताल में ऑपरेशन में दो लाख रुपये से अधिक खर्च होता। गरीबी व अज्ञानता के कारण स्वजन बीमारी को सामान्य मानकर चल रहे थे। एक सामाजिक संस्था के माध्यम से यह मामला सामने आया और उसे इलाज के अंबिकापुर बुलाया गया। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उसकी निश्शुल्क सर्जरी की गई है।

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