अम्बिकेश गुप्ता

कुसमी। सूर्य भगवान की उपासना का महापर्व छठ पूजा के लिए प्रशासन  द्वारा साफ – सफाई की तैयारियां गुरुवार से शुरू कर दी गईं हैं। 

कुसमी के सामरी रोड़ स्थित बलारी नदी, ऊपर पारा कुसमी के राजा बांध एवं करौंधा रोड़ स्थित बेनगंगा नदी सहित इस क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में छठ पर्व पर धूमधाम से मनाया जाता हैं. पूजा स्थलों में कई व्रतधारि नदी किनारे ही रात गुजार कर सुबह के सूर्य देव को अर्घ्य देने प्रतिष्ठा करते हैं. पूजा स्थलों में प्रशासन द्वारा अस्थाई टेंट व बिजली की व्यवस्था की जाती हैं. इस अवसर पर व्रत धारियों सहित परिवारजन बड़ी संख्या में गाजे-बाजे के साथ छठ घाट पहुंचकर विधि-विधान से सूर्य देव की आराधना के इस पर्व में शामिल होकर अरग ग्रहण करते हैं।

जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से छठ – घाट निर्माण पर पहल नहीं, अव्यवस्था से नगरवासी चिंतित

कुसमी के सामरी रोड़ पर बलारी नदी छट घाट में अव्यवस्था का आलम सदियों से यथावत हैं. जबकि यहाँ पर कुसमी नगर के सर्वाधिक व्रतधारियों सहित श्रद्धालुओं का पूजा में सम्मिलित होना हर साल रहता हैं. इसके साथ ही कांग्रेस – भाजपा सहित अन्य दलों के जनप्रतिनिधियों का भी छठ घाट में हर साल आना होता हैं, सामरी विधानसभा के पद पर आसीन विधायक भी छठ घाट पहुंचकर व्रत धारियों को नारियल भेंट कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं. नगर के युवा व बुजुर्गों के अनुसार कुसमी में सभी पार्टियों के अधिकांश कार्यकर्ता व जनप्रतिनिधि अपनी दखल जिला से लेकर प्रदेश सहित केंद्र में बताते हैं बावजूद इसके छठ घाट निर्माण की पहल पर मजबूती से ध्यान नहीं दिया जाना कुसमी नगर वासियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ हैं। कुसमी के नागरिक सहित नगर से लगे ग्राम कंजिया के निवासियों ने कहाँ हैं की सामरी रोड पर स्थित बलारी नदी पर सबसे ज्यादा छट व्रतधारी व परिजन यहां आते हैं सभी का हमेशा से सत्ता पर बैठे विधायक से अपेक्षा रहा हैं की इस स्थान पर भव्य छट घाट का निर्माण किया जाये परन्तु आज तक किसी प्रकार का कार्य इस ओर धरातल पर नहीं दिख रहा हैं इससे सभी अपेक्षित महसूस कर रहें हैं।

छठ पूजा के पहले प्रशासन द्वारा साफ – सफाई कर किया जाता हैं खानापूर्ति

छठ पूजा के पूर्व नगरीय प्रशासन नगर पंचायत कुसमी के द्वारा जगह – जगह साफ सफाई की जाती हैं. सामरी रोड पर स्थित बलारी नदी छठ – घाट में भी पूजा के 2 दिन पूर्व साफ – सफाई करा कर प्रशासान द्वारा अस्थाई आने – जाने के लिए पुल नुमा रास्ता बना दिया जाता हैं. इस रास्ते से गुजरने के लिए कठिनाइयों का सामना नगरवासियों सहित बच्चो को करनी पड़ती हैं. यहां पर नदी किनारे दलदल नुमा जमीन पर अव्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं का तांंता लगता है। जबकि कई वर्षो से इस स्थान में छठ पूजा की जा रही हैं बावजूद उसके आज तक न तो यहां पर सीढ़ी नुमा सीमेंट कांक्रीट का निर्माण किया गया हैं और न ही जमीन लेबल कर स्लैब का निर्माण किया गया हैं. छट पूजा नजदीक आते ही नगर पंचायत द्वारा शासकीय पैसे का बंदरबाट किया जाता रहा हैं तथा अव्यवथाओ के बिच तैयारिया कर खानापूर्ति की जाती रही हैं।

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