अंबिकापुर- क्षेत्र के ग्राम तराजू में आज रविवार को ग्रामीणों ने एक अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के उड़ने वाले गिलहरी को पकड़ कर वन अमला के हवाले किया। गिलहरी के पकड़े जाने के सम्बन्ध में ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर क्षेत्र में पेड़ों पर चढ़ने उतरने वाले गिलहरीया अक्सर दिखाई दे जाते हैं। परन्तु इस उड़ने वाले गिलहरी को देख कर लोग हैरान थे । पकड़ा गया गिलहरी पेड़ों में अपने पैर से चढ़ने उतरने के बजाय एक दूसरे पेड़ों पर उड़कर आना जाना कर रही  था जिसे लोगों ने पकड़ कर जाली वाले बांस के पिंजरे में बंद कर दिया तथा वन अमला को सूचित किया गया ।

इस गिलहरी को फ्लाइंग स्क्यूरेल के नाम से भी जाना जाता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे टेरोमायनी या पेटोरिस्टाइनी कहा जाता है। -तंक रोडेन्ट यानी कुतरने वाले जीव के परिवार का यह जंतु है जो उड़ने(ग्लाइडिंग) की क्षमता रखता है। इनकी विश्व में 44 प्रजातियां है।भारत में इसकी 12 प्रजातियां पाई जाती है। उड़ने वाली यह गिलहरी घने जंगल में मिलती है। असम तथा हिमालयीन क्षेत्र में भी उड़ने वाली गिलहरी की यह दुर्लभ प्रजाति पाई जाती है। 

भारत में उड़न गिलहरी काफी दुर्लभ मानी जाती है। भारत में कहीं-कहीं इस दुर्लभ प्रजाति के गिलहरी को देखा जाता है। यह सुखद बात है कि दुर्लभ प्रजाति की उड़न गिलहरी लखनपुर क्षेत्र में पाई गई है। वर्तमान में उड़न गिलहरी को अंबिकापुर के संजय पार्क में रखा गया है।

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