300 साल बाद गणेश चतुर्थी पर बना दुर्लभ संयोग

मनेन्द्रगढ़ । समूचे मनेंद्रगढ़ अंचल में धूमधाम से गणेश चतुर्थी मनाई गई । गणेश चतुर्थी के साथ ही देवताओं में सबसे प्रथम पूजे जाने वाले रिद्धि सिद्धि के दाता भगवान श्री गणेश का बुधवार से गणेश उत्सव शुरू हो गया है। मान्यता है कि भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि पर विध्नहर्ता और मंगलमूर्ति भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसी कारण से सभी चतुर्थी में इसका विशेष स्थान है। बुधवार से घर-घर औरजगह जगह बड़े-बड़े पंडालों में गणेश प्रतिमाएं स्थापित करके उनकी विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हुई गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलेगा। पुरोहितों के अनुसार सभी देवी-देवताओं में गणेशजी को बहुत अधिक कुशाग्र बुद्धि वाला माना गया है। गजाननजी की लम्बी सूंड महाबुद्धित्व का प्रतीक है लम्बी सूंड तीव्र सूंधने की क्षमता होती है। जिसका अर्थ है कि जो समझदार व्यक्ति है वह अपने आसपास के माहौल को पहले से ही सूंघ सकता है। गणेश जी की सूंड हमेशा हिलती-डुलती रहती है, जिसका तात्पर्य है कि मनुष्य को हमेशा सचेत रहना चाहिए । बुधवार से देशभर में गणेशोत्सव की धूम है। भगवान गणेश के भक्त अपने घरों और सार्वजनिक जगहों पर गणेशजी की भव्य प्रतिमाएं स्थापित करके विधि-विधान से पूजा कर रहै हैं। गणेशोत्सव का पर्व 9 सितंबर तक चलेगा। ऐसे आने वाले 10 दिनों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हुए लोग भगवान गणपति से जीवन में सुख-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। बुधवार से बप्पा घर-घर में विराजमान हो गये। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस तिथि पर भगवान गणेश के भक्त अपने घरों और प्रतिष्ठानों में गणपति की मूर्ति की स्थापना करते हैं और अंनत चतुर्दशी पर उनका विसर्जन करते हैं ।किसी भी शुभ कार्य जैसे धार्मिक और मांगलिक अनुष्ठान करने से पहले सबसे भगवान गणेश की पूजा अवश्य की जाती है। भगवान गणेश को मंगलकर्ता और विध्नहर्ता कहा जाता है। भगवान गणेश की पूजा और उनके बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। गजानन,विध्ननहर्ता और सिद्धि प्रदान करने वाले भगवान गणेश का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। गणेश ज्ञान और बुद्धि के ऐसे देवता हैं,जिनकी उपासना से जीवन में सुख-समृद्धि,सफलता,मान-सम्मान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।

300 साल बाद गणेश चतुर्थी पर दुर्लभ संयोग

पुरोहितों के अनुसार बुधवार से भगवान गणेश की उपासना और साधना का महापर्व गणेशोत्सव प्रारंभ हो गया है। यह 09 सितंबर तक चलेगा। इस बार की भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी बहुत ही खास और शुभ फल देने वाली है। 300 साल बाद गणेश चतुर्थी पर दुर्लभ संयोग बना रहा है। दरअसल इस बार गणेश चतुर्थी तिथि पर वही शुभ योग और संयोग बना हुआ है जो गणेशजी के जन्म के समय बना था। भगवान गणेश का जन्म बुधवार के दिन, चतुर्थी तिथि, चित्रा नक्षत्र और मध्याह्र काल में हुआ था। इसके अलावा 31 अगस्त से 9 सितंबर तक गणेश उत्सव के बीच कई शुभ और मंगलकारी शुभ योग होंगे ।

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