तबादले के बाद भी कई विभागों में जमे हुए हैं अधिकारी-कर्मचारी

बैकुण्ठपुर/ कोरिया जिले में शासन की तबादला नीति को ठेंगा दिखाना आम बात है।यही कारण हैं कि  जिन अधिकारी, कर्मचारियों के स्थानांतरण हुए हैं, उन्हें अभी तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है। जबकि शासन ने सभी स्थानांतरण हुए अधिकारी को  अनिवार्य रूप से कार्यमुक्त करने का सख्त निर्देश जारी किया हैं । किंतु अधिकारी कुर्सी की मोह व पुराने कार्यो के भुगतान को लेकर  कार्यालयों में अंगद की पैर की तरह जमे हुए हैं । वहीं आला अधिकारी चहेते कर्मचारियों को अपने साथ रखने के लिए कोई ना कोई बहाना बना रहे हैं। इससे शासन की तबादला नीति के पश्चात भी जमे  अधिकारियों को हटाने की मंशा पर पानी फिर रहा है। ऐसा ही मामला कोरिया जिले में स्तिथ गुरु घासीदास राट्रीय उद्यान विभाग बैकुंठपुर जिला कोरिया के रेहड़ वन परीक्षेत्र का हैं। जहा प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन व जलवायु परिवर्तन विभाग रायपुर से मार्च 2022 में रेगुलर रेंजर ललित साय पैकरा की पदस्थापना बैकुंठपुर में हुई। जिन्होंने 29 अप्रैल को ज्वाईन किया व 13 जून को एकतरफा प्रभार ले लिया। किन्तु संचालक महोदय ने उन्हें बैंक में सिग्नेचर वैरिफाई के लिए नही भेजा जिससे वर्तमान में डिप्टी रेंजर ही आहरण व कुर्सी में जमे है । साथ ही  कोरिया जिले के बैकुंठपुर में स्तिथ कोरिया वन मंडल के सोनहत के प्रभारी  रेंजर अर्जुन पटनायक   का स्थानांतरण  कोटाडोल वन क्षेत्र में हुआ व इनके स्थान पर एक नए अधिकारी की नियुक्ति भी शासन द्वारा किया गया। किन्तु जिले के अधिकारियों के स्वार्थ सिद्धि के कारण अब तक नए अधिकारी को प्रभार नही मिल पाया। जबकि स्थान्तरण हुए लगभग चार से छः माह हो गए। यह जिले का कोई पहला मामला नही है। जिले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग स्तर के भी कुछ ऐसे अधिकारी हैं जिन्हें स्थान्तरण के पश्चात रिलीफ नही किया गया। वही कुछ अधिकारी तो जिले में ऐसे भी हैं जो  स्थान्ततरण से आने के पश्चात दुबारा स्थानांतरण होने के बाद जिले से गये ही नही। जिससे शासन की स्थानांतरण नीति को लेकर सवाल उठना लाजमी हैं !

विदित है कि प्रदेश सरकार ने सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और कामकाज में पारदर्शिता लाने के मकसद से तबादला नीति बनाई। इसके अंतर्गत एक जिले में तीन साल पूरा करने वाले अधिकारी, कर्मचारियों को स्थानांतरण पर काम शुरू किया। इस नीति में तमाम विभागों में अधिकारी, कर्मचारी इधर-उधर हो गए। इससे पीएचई, जल संसाधन विभाग , जनपद व राजस्व  सहित दर्जनों कार्यालय ऐसे है जहां ट्रांसफर  हुए कर्मचारी व अधिकारी टीके हुए है। विडंबना यह है कि जिले के कई अधिकारी कर्मचारी ऐसे है जो लाखो रुपयों का घोटाला कर चले गए। फिर भी संविदा के जुगाड़ में लगे हैं कुछ पा भी गए , तो वहीं अन्य अधिकारी, कर्मचारी अपना क्षेत्र छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसमें आला अधिकारी उनका साथ देते दिखाई दे रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी विगत दो तीन वर्षो से स्थानांतरण नीति में कई अधिकारी, कर्मचारियों का तबादला हुआ था। इस दौरान स्थानांतरित अधिकारी, कर्मचारियों नें अपना कार्यक्षेत्र नहीं छोड़ा था। कुछ जिला कार्यालयों के सीधे साधे अधिकारी व कर्मचारी  को एकतरफा कार्यमुक्त कर दिया गया था। उसके बाद भी वह आला अधिकारियों से सेटींग बना कर अभी भी यहीं डटे हुए है। अब जिन स्थानांतरित अधिकारियों व कर्मचारी से आला अधिकारियों को धन का फायदा हो रहा है उन्हें छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि वो वहां भी वही कार्यालय का कार्य करेंगे जो यहां कर रहे है। यहां के बारे मे उन्हे जानकारी ज्यादा है जिसके  कारण से सरकारी  कार्य समय से पुर्ण हो जा रहे है, ऐसे तर्क चिंतनीय हैं ।कुछ कार्यालयों मे वर्षों से नहीं हुआ तबादला-

मिली जानकारी अनुसार जिले मे कई ऐसे शासकीय कार्यालय है जहां शासकीय  कर्मचारी अंगद के पैर की तरह जमे हुए है। यहां पर शासकीय कार्यालयों मे कार्यरत अधिकांश कर्मचारियों  जैसे बडे बाबु, सहायक ग्रेड तीन, सहायक ग्रेड दो  कर्मचारियों  को कार्य करते हुए 10 से 15 साल हो गए हैं। ऐसे कर्मचारियों के तबादले होते हैं, लेकिन उन्हें हटाया नहीं जाता है। यही   कारण है की शासकीय कार्यालयों मे जम कर अनियमितता की शिकायत मिल रही  है। शिकायत के बाद भी ऐसे लोगों पर कार्यवाही नही होती यदि होती भी है तो अधिकारी कोरम पुरा कर लीपापोती मे लग जाते है। जरूरत हैं जिले के शासकीय कार्यालयों में पारदर्शिता लाने शासन के स्थान्तरण नीति के पहल की ताकि किसी नये अधिकारी को पदभार लेने वर्षो। इंतज़ार न करना पढ़े जैसा कि हाल ही में कोरिया जिले के राष्ट्रीय उद्यान व कोरिया वन मंडल में अधिकारी  को प्रभार लेने चार से छहः माह का समय लग जा रहा ।

Categorized in: