एटक की संगठनात्मक बैठक में जेबीसीसीआई मेंबर तथा एटक मध्य प्रदेश के अध्यक्ष कामरेड हरिद्वार सिंह ने केंद्र सरकार पर किया तीखा प्रहार

गिरजा ठाकुर / शशि रंजन


जरही/भटगांव। संयुक्त कोयला खदान मजदूर संघ एटक की संगठनात्मक बैठक भटगांव के न्यू माइन्स कॉलोनी में स्थित श्रमिक कार्यालय में हुई। बैठक में मुख्य अतिथि जेबीसीसीआई मेंबर तथा एटक मध्य प्रदेश के अध्यक्ष कामरेड हरिद्वार सिंह व कार्यक्रम अध्यक्ष एसईसीएल के एटक अध्यक्ष अजय विश्वकर्मा थे।


श्रमिक संग़ठन के प्रतिनिधियों, कोयला कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कामरेड हरिद्वार सिंह ने कहा हमारे बीएमएस नेता, कोयला प्रभारी लक्ष्मण रेड्डी जमुना कोतमा आए थे तो उन्होंने एक पत्रकार के चार सवाल पर सरकार के कामों का समर्थन करने की बात कही। उन्होंने कहा यह कैसी सरकार है, 5 साल से 12 साल के बच्चों का हॉफ टिकट लगता था, उसे खत्म कर दिया अब एक साल के बच्चों का भी पूरा टिकट देना पड़ेगा। ट्रेड यूनियन बनाना बहुत ही कठिन हो गया। मालिक और मजदूर का जो रिलेशन था उसको समाप्त कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा को खत्म कर दिया गया। ट्रेड यूनियन बनाने के लिए 10 परसेंट मेंबर होना चाहिए ऐसा लेबर कानून बना दिया, जिसका मालिक और प्रबंधन सर्टिफाई करेगा तभी रजिस्ट्रेशन होगा। आखिर एक मजदूर नेता की तरफ से कौन सी ऐसी चीज है जिससे हम सरकार के समर्थन करें। इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 99, 84 में मालिक और मजदूर में झगड़ा होता था, तो कैंसिलेशन में लेबर कमीशन बीच-बचाव का रास्ता निकालता था, उस कॉज को ही खत्म कर दिया गया।

एक नौजवान आइटीआई करने के बाद खदान या फैक्ट्री में जाकर ट्रेनिंग करता है तो उसको नियमित नौकरी मिल जाती थी, उस एक्ट को खत्म कर दिया गया। सरकार ने रेल को बेच दिया, भेल को बेच दिया, सेल को बेच दिया, हद तो यह हो गई कि हाइवे एक्सप्रेस को भी बेच दिया, हवाई जहाज भी बेच दिया, हवाई अड्डा को बेच दिया। किसानों को देने के लिए ऋण नहीं है लेकिन मुकेश अंबानी को चौबीस हजार करोड़ का सरकार ने लोन माफ कर दिया। क्या इस काम का हम समर्थन करें, जितने भी लुटेरे हैं चाहे वह नीरव मोदी हो, विजय माल्या हो, वे सब पैसा लेकर भाग गए।

सरकार को उनकी चिंता नहीं है पर एक बड़ा डिफॉल्टर 42 सौ करोड़ का घोटाला किया और पकड़ा गया, उसने स्टेटमेंट दिया कि मैंने भारतीय जनता पार्टी को 29 करोड़ चंदा दिया है, क्या बीएमएस के लोग ऐसे काम का समर्थन करते हैं। कोयला खदान को खंड-खंड में बांटने का प्रयास कर रही है सरकार, क्या वो इस काम का समर्थन कर रहे है। रसोई गैस का दाम बढ़ा दिया, पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ा दिया, देश में महंगाई चरम पर पहुंच गई। दाल, चावल और आटा पर भी जीएसटी लगा दिया, क्या हम इस काम का समर्थन करें। यह सरकार जन विरोधी, किसान विरोधी, मजदूर विरोधी है। हम कभी इसका समर्थन नहीं कर सकते हैं। सरकार हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देने की बात कही, अब तक सात साल में 14 करोड़ लोगों को रोजगार मिल जाता।

सब जगह लफाजी और झूठ से ज्यादा और कुछ भी नहीं है। नमक पर अंग्रेजों ने केवल पांच प्रतिशत टैक्स लगाया, कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत की जनता सड़कों पर आ गई इस फैसले के खिलाफ जिसे उन्हें वापस लेना पड़ा लेकिन पढ़ी-लिखी जनता खामोश है। उन्होंने कहा वे इस देश के किसानों को सलाम करते हैं, जिन्होंने नौ महीने आंदोलन किया, 790 किसानों ने बलिदान दिया और भारत सरकार को घुटने टेकवा दिए, जिस कारण तीनों काले कानून को सरकार को वापस लेना पड़ा। उन्होंने बीएमएस के लोगों से आह्वान किया कि लोगों के हित, खदान, कोल इंडिया को एक करने, बेहतर बीसीसीआइ लागू करवाने, भारत को मजबूत करने, बेहतर बोनस दिलाने, जो लोग विस्थापित हो रहे हैं उनको रोजगार दिलाने, लोगों में नफरत पैदा नहीं करने की सोचें। बैठक को कामरेड अजय विश्कर्मा, मनोज पांडेय ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर अखलाख खान, हरेंद्र सिंह, हरिष बड़ा सहित काफी संख्या में कोयला कामगार मौजूद थे।

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