जनदर्शन में मिलने पहुंचे बुजुर्गों के स्वस्थ व दीर्घायु होने की कामना की कलेक्टर ने

गिरजा ठाकुर
अंबिकापुर। शहर के वृद्धाश्रम में रहने वाले अमृतसर व उत्तर प्रदेश के दो वृद्ध भरा-पूरा परिवार होने के बाद भी अपनों से दूरी का दंश झेल रहे हैं। इन वृद्धों को समाचार पत्रों के माध्यम से शहर के वरिष्ठ नागरिक विजय पटेल की मृत्यु के बाद देहदान करने की जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने मृत्यु पूर्व देहदान करने की ठान ली, ताकि उनका शरीर मेडिकल के छात्रों की पढ़ाई के काम आए। इसके बाद उन्होंने लावारिस हाल में पंचतत्व में विलीन होने के बजाए अपनी मंशा से राघवपुरी में स्थित आस्था निकुंज, वृद्धाश्रम के अधीक्षक को अवगत कराया। वे इस पुनीत कार्य की जानकारी अपने हितचिंतक या किसी स्वजन को नहीं देना चाहते थे। इसकी जानकारी आश्रम के अधीक्षक संजय ठाकुर ने समाज कल्याण विभाग को दी, जिस पर उन्होंने वृद्धों की भावनाओं का सम्मान करते हुए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया था। मंगलवार, 20 दिसंबर को दोनों वृद्ध कलेक्टोरेट में चल रहे जनदर्शन कार्यक्रम के बीच आश्रम अधीक्षक के साथ पहुंचे और लंबे समय से बनी परिवार से दूरी के बीच शरीर का साथ मिलने तक काम करके जीवकोपार्जन करने और अशक्तता के बाद वृद्धाश्रम में रहने की गाथा सुना मेडिकल कॉलेज के बच्चों की पढ़ाई के देहदान करने की अंतिम इच्छा व्यक्त की। कलेक्टर कुंदन कुमार ने दोनों बुजुर्गों की भावनाओं का सम्मान करते हुए देहदान की प्रक्रियाओं से उन्हें अवगत करा फार्म भरवा उनके स्वस्थ और दीर्घायु होने की कामना कर विदा किया।


दोस्त के यहां 16 माह रहने के बीच पुत्र-पुत्री ने नहीं ली सुध
ब्रह्मप्रकाश कसेरा की उम्र 84 वर्ष है, वे पंजाब के अमृतसर निवासी हैं। चार वर्ष पूर्व वे वृद्धाश्रम पहुंचे, इसके बाद यहीं के होकर रह गए। ब्रह्मप्रकाश बताते हैं कि वर्ष 1965 में वे अंबिकापुर आ गए थे और छाबड़ा मेटल नामक दुकान में काम करके जीविका चला रहे थे। बूढ़ी हड्डियां काम के योग्य नहीं रही तो वापस अमृतसर चले गए। उनकी पत्नी की मौत के बाद एक पुत्र व पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार है। यहां आने के बाद वे अपने मित्र के यहां 16 माह गुजारे लेकिन दोनों में से किसी ने उनकी सुध नहीं ली। अपनों से बनी दूरी के बीच वे किसी पर बोझ बनने के बजाए चार वर्ष पूर्व वापस अंबिकापुर आ गए। यहां रहने के दौरान बीते 13 नवंबर को देहदान की जानकारी अखबार से मिली और उन्होंने नश्वर शरीर को किसी का हकदार बनाने के बजाए मेडिकल कॉलेज के छात्रों की पढ़ाई के लिए देने का संकल्प ले लिया।  


पत्नी की मौत के बाद अकेलापन खींच लाया वृद्धाश्रम  
वृद्धाश्रम में एक वर्ष से रहने वाले जगदीश प्रसाद गुप्ता की उम्र 66 वर्ष है। उन्होंने बातचीत के दौरान बताया कि वे जौनपुर उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं। वर्ष 1998 से अंबिकापुर में रहकर हलवाई का काम शरीर जब तक साथ दिया करते रहे। पत्नी की मौत के बाद बच्चों के नहीं होने से वे बेसहारा हो गए। इसके बाद एक वर्ष पूर्व उन्होंने वृद्धाश्रम की राह पकड़ ली, इसके बाद से वे यहीं अनजान लोगों के अपनत्व की छांव में रह रहे हैं। उन्होंने अखबार में उन्होंने अंबिकापुर के विजय पटेल के द्वारा मृत्यु पूर्व किए गए देहदान का समाचार पढ़ा था, जिसे उनकी मौत के बाद मेडिकल कॉलेज के सौंपा गया। इसके बाद उन्होंने भी देहदान का संकल्प ले लिया।

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