अंबिकापुर। मैनपाट के आदिवासी बाहुल्य गांव में ग्रामीणों को हडिय़ा शराब के सेवन से होने वाले दुष्परिणामों से बचाने के लिए कलेक्टर कुंदन कुमार के निर्देश पर आबकारी एवं पुलिस विभाग के द्वारा हंडिया तोड़ो अभियान चलाया गया।
जिला आबकारी अधिकारी नवनीत तिवारी ने बताया कि कलेक्टर सरगुजा के निर्देशन में चलाए गए इस अभियान के क्रम में मैनपाट के आदिवासी बाहुल्य गांव में पहुंचकर आबकारी विभाग की टीम ने घर-घर जाकर मदिरा व हडिय़ा शराब के संबंध में जांच की गई। उन्होंने मौके पर जब्त हडिय़ा शराब का नष्टीकरण कर निपटान किया। ग्रामवासियों से चर्चा व कार्रवाई के दौरान उन्हें मादक पेय पदार्थ के निर्माण एवं सेवन से पडऩे वाले शारीरिक प्रभावों एवं जोखिमों की जानकारी देते हुए समझाइश दी गई और मादक पेय पदार्थ नहीं बनाने का आग्रह किया। आबकारी विभाग की टीम ने शराब बनाने वाले व्यक्तियों की सूची तहसीलदार मैनपाट को सौंपी है। इस दौरान काफी मात्रा में मादक पदार्थों का विनिष्टीकरण किया गया। क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही भी इन दिनों बढ़ी है। महुआ शराब की गंध इन्हें गांव और घरों के करीब लाती है। ऐसे में ग्रामीणों को सतर्क करने का पूर्व में भी प्रशासनिक प्रयास हुआ है, लेकिन कई ग्रामीणों के जीवकोपार्जन का माध्यम महुआ व हडिय़ा शराब होने से यह कार्य उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया है। गाहे-बगाहे इन ग्रामीणों को पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण रहे सकते में
मैनपाट क्षेत्र में अचानक पुलिस और आबकारी विभाग की टीम के घर-घर पहुंचने से ग्रामीण सकते में रहे। जैसे ही लोगों का इसका पता चला कुछ लोग घरों में ताला लगाकर निकल लिए। वहीं मौका देख कई ग्रामीण बनाकर रखी गई महुआ शराब और हडिय़ा को सुरक्षित करने की जुगत में लग गए। हालांकि टीम ने प्रथम चरण में ग्रामीणों को समझाइश देते हुए उनसे महुआ शराब या हडिय़ा का निर्माण नहीं करने कहा है। सूचीबद्ध किए गए ग्रामीण पुन: इस कारोबार में लिप्त मिलते हैं तो उन पर कार्रवाई की गाज भी गिर सकती है।

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