गिरजा ठाकुर

अंबिकापुर। प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री रामसेवक पैकरा ने भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा द्वारा आयोजित पत्रकारवार्ता में कहा कि उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा छत्तीसगढ़ लोक सेवा आरक्षण संशोधन अधिनियम 2012 को अपास्त घोषित करना छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार की उदासीनता का परिणाम है। छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार जनजाति हितैषी होने का ढोंग रच रही है। अगर उच्च न्यायालय के समक्ष सही पहल किया गया होता, तो उक्त अधिनियम को अपास्त नहीं किया गया होता। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह की सरकार ने दिसंबर 2011 में जनजाति समाज को प्रदेश में जनसंख्या के अनुपात में 32 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था, वर्ष 2018 तक भाजपा की सरकार रही, तब तक यह कानून लागू रहा। उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बाद भाजपा सरकार ने वर्ष 2018 तक जनजाति समाज के हित में मजबूती के साथ खड़े होकर उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखा, जिसके कारण आरक्षण यथावत रहा। कांग्रेस की सरकार आने के बाद से जनजाति समाज के साथ षड्यंत्र होना प्रारंभ हो गया और जान-बूझकर जनजाति वर्ग के पक्ष में ठीक से उनका पक्ष नहीं रखा गया। परिणाम स्वरुप उच्च न्यायालय में जनजाति समाज के खिलाफ दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय सामने आया है। पूर्व अजजा आयोग के अध्यक्ष व सांसद कमलभान सिंह ने कहा पहले भी कांग्रेस की सरकार ने अनुसूचित जनजाति वर्ग को छलने का काम किया है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पदोन्नति में आरक्षण का नया नियम बनाने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने तीन साल लगाए। उच्च न्यायालय में पदोन्नति नियम 2003 को भाजपा सरकार ने पूरे 15 साल के कार्यकाल तक कानूनी चुनौती से बचा कर रखा, परंतु कांग्रेस की सरकार आते ही मूल कंडिका पांच फरवरी 2019 को पास हो गई, तब से लेकर अब तक पदोन्नति में आरक्षण का कोई रास्ता भूपेश बघेल की सरकार ने नहीं निकाला है।   भूपेश बघेल की सरकार बनने के बाद से पदोन्नति में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष ललन प्रताप सिंह, पूर्व संसदीय सचिव सिद्धनाथ पैकरा, वरिष्ठ भाजपा नेता त्रिलोक कपूर कुशवाहा, जिला महामंत्री देवनाथ सिंह पैकरा, जिला संवाद प्रमुख संतोष दास, जिला सह संवाद प्रमुख रूपेश दुबे, बिहारी तिर्की, धनाराम नागेश, अंकित तिर्की, निशीकांत भगत, पूरन टेकाम, रोचक गुप्ता सहित अन्य उपस्थित रहे।
उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत करे सरकार  
अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष राम लखन सिंह पैकरा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार अनुसूचित जनजाति वर्ग के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में हर जगह नाकाम रही है। संवैधानिक अधिकारों के परिपालन में जब-जब मामला न्यायालय में गया है, तब-तब भूपेश बघेल की सरकार ने जानबूझकर लापरवाही का प्रदर्शन किया है। जनजाति वर्ग से राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुरमू का भी छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने कोई समर्थन नहीं किया, अभी जब केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा आदिवासी हित में 12 जनजातियों को संवैधानिक सूचीबद्ध किया गया तो इसका श्रेय लेने के लिए छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने खूब ढिंढोरा पीटने का काम किया। श्री पैकरा ने कहा कि कांग्रेस की भूपेश सरकार द्वारा सही पहल नहीं करने से जनजाति वर्ग दुखी है। जनजाति हित में भूपेश सरकार को चाहिए कि उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत करें और सर्वोच्च न्यायालय तक मजबूती के साथ पक्ष रखें।

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