अंबिकापुर। पर्यटन स्थलों को संरक्षित करने एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूर्व में भी जिला पंचायत सदस्य एवं रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरपर्सन आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने राज्य सरकार को पत्र लिख कर शहर के नजदीक एक अच्छा ईको टूरिज्म पार्क के रूप में विकसित करने की मांग की थी, वन विभाग ने भी इस पर प्रस्ताव बना कर भेजा था, किंतु कोविड के कारण इस पर कार्रवाई नहीं हुई। एक बार फिर से पिलखा पहाड़ को संरक्षित करने एवं उसे विकसित करने को लेकर शुक्रवार को सुबह छह बजे जिला पंचायत के उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव, जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश गुप्ता, एमआइसी सदस्य द्वितेंद्र मिश्रा, विनय गुप्ता, सीसीएफ, डीएफओ के अलावा वन विभाग का जमीनी अमला सहित स्थानीय ग्रामीण काफी संख्या में पिलखा पहाड़ चढ़कर उसकी सुंदरता को देखने पहुंचे। पिलखा पहाड़ पर डोभीझरना एवं उसके पहले स्थित काफी लंबी गुफा सहित सेल्फी पॉइंट, पेड़ एवं पत्थरों के बीच से निकला संकरा चढ़ाई रास्ता जो कि लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है, देखकर जिला पंचायत उपाध्यक्ष सहित वन विभाग के उच्च अधिकारी भी काफी खुश हुए।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव के आग्रह पर वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह क्षेत्र शहर के काफी नजदीक व अच्छा स्थान है। एक बार में इसे विकसित करने पैसे नहीं मिल सकते इसलिए पार्ट-पार्ट में छोटे कार्ययोजना बनाकर इसे विकसित किया करने का प्रयास करेंगे। सबसे पहले सरगुजा जिले के अंतर्गत आने वाले पिलखा पहाड़ के लगभग नौ किमी का फेंसिंग कार्य, बरगद एवं पीपल का वृक्षारोपण सहित विभिन्न कार्य कराने हेतु योजना बनाई जाएगी ताकि पिलखा पहाड़ को संरक्षित कर पर्यटन के प्रति लोगों को आकर्षित कर सकें। इस दौरान पिलखा पहाड़ के ऊपर डोभीझरना पहुंच अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने झरने के पानी को पीकर अपनी प्यास बुझाई तथा गुफा एवं सेल्फी पेड़ सहित अन्य स्थानों पर फोटो खिंचवाए। जीपीएस के माध्यम से जगहों को लॉकेट किया ताकि आने वाले समय में इन स्थानों पर अच्छा कार्य कर सकें। सीसीएफ ने कहा कि जल्द ही इसकी कार्ययोजना बना अलग-अलग योजनाओं से थोड़ी-थोड़ी राशि जुटाकर पिलखा के विकास हेतु कार्य करेंगे। जनप्रतिनिधियों की पिलखा पहाड़ को संरक्षित एवं विकसित करने की मंशा को पूरा किया जाएगा। सीसीएफ, डीएफओ सहित जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने इन दौरान स्थानीय ग्रामीणों से भी चर्चा की एवं जंगल को संरक्षित करने के लिए क्या करना चाहिए, कैसे कटाई रोकी जा सकती है, इस पर उनके सुझाव लिए।

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