रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- सहकारी समितियों के द्वारा धान खरीदी करने के 72 घंटे में उठाव का अनुबंध जिला विपणन अधिकारी से किया जाता है परंतु आदिम जाति सेवा सहकारी समिति महावीरगंज में आज भी 35 हजार बोरी धान खुले आसमान के नीचे रखे हुए हैं। उठाव के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिल रहा है वही लगातार मौसम खराब एवं धूप के कारण धान खराब हो रहा है एवं सुख रहा है जिसे लेकर समिति चिंतित है।

गौरतलब है कि शासन के निर्देश के पर 31 जनवरी तक सहकारी समितियों के द्वारा धान की खरीदी की गई थी करीब-करीब जिले के सभी सहकारी समितियों में निर्धारित बफर लिमिट से अधिक धान खुले आसमान के नीचे रहा जिसके लिए जिले के सभी सहकारी समितियों के प्रबंधकों के द्वारा जिला विपणन अधिकारी से मिलकर ज्ञापन सौंप उठाव किए जाने की मांग की थी। जिसके बाद भी उठाव में तेजी नहीं आई यहां तक की मंथर गति से ही उठाव होता रहा वहीं आदिम जाति सेवा सहकारी समिति महावीरगंज में 35 हजार बोरी में 14000 क्विंटल धान अभी भी खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। उठाव के लिए कई बार धान खरीदी प्रभारी मंगलेश प्रजापति के द्वारा पत्राचार किया गया वही व्हाट्सएप के माध्यम से भी उठाव के लिए अनुरोध किया गया परंतु आज तक उठाव नहीं हो पाया है।

3 से 4 किलो की हो गई सूखती……. खुले आसमान के नीचे लगातार धूप एवं बीच-बीच में हो रही बारिश के कारण प्रत्येक बोरा से 3 से 4 किलो धान सूख गया है वहीं धान भी अब खराब होने लगा। समिति के द्वारा 40 किलो 700 ग्राम धान की खरीदी की गई थी। प्रत्येक बोरा से 3 से 4 किलो सुखती जाने पर समिति भी चिंतित है कि इसकी भरपाई कैसे करेंगे।

कोरोना के डर से चौकीदार भी भाग भाग जा रहे हैं…… एक ओर जहां महावीरगंज सहकारी समिति में खुले आसमान के नीचे धान रखा हुआ है। वही कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण चौकीदार भी डर से बार-बार भाग जा रहे हैं जिससे परेशानी और बढ रही है।

इस संबंध में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति महावीरगंज के धान खरीदी प्रभारी मंगलेश प्रजापति ने बताया कि 35 हजार बोरी खुले आसमान के नीचे है। धान उठाव के लिए कई बार मैंने पत्राचार किया वही व्हाट्सएप से भी अधिकारियों को अवगत कराया परंतु अभी भी धान का उठाव नहीं हो पाया है जिससे हम सभी चिंतित हैं। धान लगातार धूप में सूख रहा है।

Categorized in: