Budget and Kisan: सरकार तिलहनों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर खाद्य तेलों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति बनाएगी। डेयरी किसानों को समर्थन देने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम भी शुरू होगा। गुरुवार को पेश अंतरिम बजट में कहा गया कि पीएम-किसान सम्मान योजना के तहत हर वर्ष सीमांत और छोटे किसानों सहित 11.8 करोड़ किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता दी जाती है।

खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता पर जोर: खाद्य तेलों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेलों का आयात करता है। विपणन वर्ष 2022-23 (नवंबर-अक्तूबर) के दौरान, देश ने लगभग 165 लाख टन खाद्य तेलों का आयात किया, जिसका मूल्य 1.38 लाख करोड़ रुपये था।

अंतरिम बजट में घोषणा की गई कि वर्ष 2022 में घोषित पहल पर आगे बढ़ते हुए सरसों, मूंगफली, तिल, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसे तिलहनों के मामले में आत्मनिर्भरता के लिए एक रणनीति तैयार होगी। इसमें उच्च उपज देने वाली किस्मों के लिए अनुसंधान, आधुनिक खेती तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाने, बाजार संपर्क, खरीद, मूल्यवर्धन और फसल बीमा को शामिल किया जाएगा।

डेयरी क्षेत्र में मौजूदा योजनाओं को परिणामदायी बनाया जाएगाः बजट भाषण में वित्त मंत्री ने डेयरी किसानों के समर्थन के लिए एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किये जाने की बात कही। कहा गया कि खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने के प्रयास पहले से जारी हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है, लेकिन दुधारू पशुओं की उत्पादकता कम है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय पशुधन मिशन और डेयरी प्रसंस्करण एवं पशुपालन के लिए बुनियादी ढांचा विकास निधि जैसी मौजूदा योजनाओं की सफल करते हुए परिणामदायी बनाया जाएगा।

चार करोड़ किसानों को फसल बीमा दियाः बजट भाषण में जानकारी दी गई कि पीएम फसल बीमा योजना के अंतर्गत चार करोड़ किसानों को फसल बीमा प्रदान किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि अन्नदाता को देश और पूरी दुनिया के लिए अन्न पैदा करने में सहायता दी जा रही है। देशभर में इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट ने 1361 मंडियों को एकीकृत कर दिया गया और इसमें तीन लाख करोड़ रुपये मूल्य का कारोबार हो रहा है। 1.8 करोड़ किसानों को सेवाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि पीएम फसल बीमा योजना अन्नदाता को देश और दुनिया के लिए भोजन पैदा करने में सहायता कर रही है।

2.4 लाख स्वयं सहायता समूहों को मददः वित्त मंत्री ने अंतरिम बजट में कृषि क्षेत्र में मूल्य-वर्धन और किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रयासों का प्रावधान किया है। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से 38 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं और रोजगार के 10 लाख अवसरों का सृजन हुआ।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम के औपचारिकीकरण योजना से 2.4 लाख स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) और 60 हजार व्यक्तियों को ऋण सुविधा प्राप्त करने में सहायता मिली। वित्त मंत्री ने बजट में फसलों के एकत्रीकरण, आधुनिक भंडारण, दक्षतापूर्ण आपूर्ति श्रृंखला, प्राथमिक और माध्यमिक प्रसंस्करण तथा विपणन एवं ब्रांड तैयार करने में निजी और सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देने की घोषणा की।

पीएम-किसान सम्मान निधि 8-10 हजार रुपये होः कृषि विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने कहा कि वित्त मंत्री ने सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। किसानों को हर साल मिलने वाली पीएम-किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर आठ से 10 हजार रुपये सालाना करना चाहिए था। वर्तमान में पीएम-किसान योजना के तहत सरकार तीन समान मासिक किस्तों में हर वर्ष 6,000 रुपये का वित्तीय लाभ प्रदान करती है। यह राशि महंगाई को देखते हुए नाकाफी हैं।

शर्मा ने कहा कि भारत की कृषि विकास दर 1.8 फीसदी है जो देश की संभावित जीडीपी सात फीसदी से काफी कम है। देश का कृषि क्षेत्र पिछले कई महीनों से संकट के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, हालांकि बजट में स्वयं सहायता समूह के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने का उपाय किया गया। इससे ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के हालात सुधरे हैं। तेलंगाना व अन्य दक्षिण के राज्यों में प्राकृतिक खेती का तेजी से विस्तार हो रहा है।

विभिन्न फसलों पर नैनो डीएपी का इस्तेमाल होगा: वित्त मंत्री ने नैनो यूरिया व नैनो डीएपी की सफलता को देखते हुए इनका इस्तेमाल दूसरी फसलों पर करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सभी कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न फसलों पर नैनो डीएपी का प्रयोग किया जाएगा।

2019 में हुई पीएम-किसान योजना की घोषणा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) दुनिया की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजनाओं में से है। पीएम-किसान योजना के तहत सरकार तीन समान मासिक किस्तों में हर वर्ष 6,000 रुपये का वित्तीय लाभ प्रदान करती है। यह पैसा देशभर के किसान परिवारों के बैंक खातों में ‘डीबीटी’ के जरिये डाला जाता है। फरवरी 2019 में अंतरिम बजट में इसकी घोषणा की गई थी।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का कार्यान्वयन बढ़ेगा

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने मछुआरों की सहायता के महत्व को समझते हुए मत्स्य पालन के लिए अलग विभाग स्थापित किया है। इसके चलते अंतर्देशीय और जलीय कृषि उत्पादन दोगुना हो गया है। वित्त वर्ष 2013-14 से समुद्री खाद्य निर्यात भी दोगुना हो गया है। उन्होंने घोषणा की कि जलीय कृषि उत्पादकता को मौजूदा तीन से पांच टन प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाने, निर्यात को दोगुना करके एक लाख करोड़ रुपये करने और निकट भविष्य में 55 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) के कार्यान्वयन को बढ़ाया जाएगा। पांच एकीकृत एक्वापार्क भी स्थापित किये जाएंगे।

कृषि मंत्रालय का कुल बजट 1,27,469.88 करोड़ रुपये

इसमें कृषि विभाग को 1,17,528.79 करोड़ और कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डीएआरई) को 9,941.09 करोड़
मंत्रालय/विभाग 2023-24 में आवंटन 2024-25 में आवंटन
सहकारिता 747.84 1,183.39

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग 2,911.95 3,290
मत्स्य पालन 1,701 2,584.50

पशुपालन और डेयरी 3,913.93 4,521.24
(सभी आंकड़े करोड़ रुपये में)

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