बिश्रामपुर। एसईसीएल क्षेत्र के रिकार्ड कोयला उत्पादन देने के बाद भी क्षेत्र की खदानों में कार्यरत कर्मचारियों व ठेका श्रमिक को मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकने विवश होना पड़ रहा है। श्रमिकों के लिए कैंटीन, रेस्ट सेल्टर, लेट्रिन बाथरूम तथा पीने का शुद्ध पानी की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। केंद्रीय चिकित्सालय में भी सुविधाओं का काफी अभाव देखने को मिल रहा है। इस संबंध में एसईसीएल वेलफेयर बोर्ड के सदस्य अजय विश्वकर्मा ने बताया कि दो दिन पूर्व केंद्रीय चिकित्सालय तथा खदानों का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि एसईसीएल के निदेशक कार्मिक के उदघाटन किए जाने के बाद पिछले दो वर्षों से डायलेसिस सेंटर बंद हो गया है। चिकित्सालय में मरीजों का बेड वर्षो पुराना होने के कारण आरामदायक नहीं रहे, कई बेड के पाया में ईंट लगाकर काम चलाया जा रहा है। एडमिट मरीजों का दवा टेबल, मिनी आलमीरा क्षतिग्रस्त है। ओपीडी तथा वार्ड में मरीजों के बैठने का फर्नीचर वर्षों पुराने एवं क्षतिग्रस्त हैं। अधिकारी स्टाफ तथा अतिगंभीर मरीजों के लिए निर्मित केबिन का विंडो एसी खराब होकर बिखरे हुए हैं। केंद्रीय चिकित्सालय का जेनरेटर सेट काफी पुराना है जो चलते-चलते बंद हो जाते हैं, जिससे एडमिट मरीजों को काफी परेशानी तथा चिकित्सीय कार्य में बाधा हो रही है। चिकित्सालय का मरच्यूरी सर्वे ऑफ हो चूका है। दो शव वाला नया मरच्यूरी का फाइल 3-4 वर्ष से लंबित है। सुरक्षा की दृष्टि से चिकित्सालय में सीसी टीवी कैमरा लगाना नितांत आवश्यक है।चिकित्सालय में मॉडलर किचेन नहीं है। एडमिट मरीजों को 2-3 वर्षो से फल नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह भी बातें सामने आई हैं कि 120 रुपए में प्रति मरीज की राशि कम है। द्वितीय तथा तृतीय पल्ली में वार्ड आया की बेहद कमी के कारण एडमिट मरीजों को परेशानी हो रही है। चिकित्सालय में कार्यरत वार्ड आया, सफाई कर्मचारी, लेब एक्स रे फार्मासिस्ट को गत 3 वर्ष से ड्रेस प्रदान नहीं किया गया है। दवाओं की भी काफी कमी है। उन्होंने बताया कि गायत्री खदान में 632 कर्मचारी तथा 150 ठेका श्रमिक कार्यरत हैं। गायत्री खदान के केंटीन में 4 विंडो एसी में 2 एसी वर्षों से बंद है। केंटीन में कर्मचारियों के बैठने हेतु सिर्फ 8 चेयर तथा 3 प्लास्टिक के क्षतिग्रस्त टेबल हैं।सिर्फ एक पल्ली में चलने वाला केंटीन बंद होने के बाद पुरे गायत्री खदान परिसर में कर्मचारियों को पीने के लिए वाटर कूलर आरओ शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं होती है। खदान के भीतर 8 घंटा जी तोड़ मेहनत करने वाले कर्मचारियों को शुद्ध पीने का पानी भी नहीं मिलता है और ना ही किसी भी कर्मचारी को पानी का डब्बा उपलब्ध कराया गया है। इसी प्रकार रेहर खदान में 558 कर्मचारी और 40 ठेका श्रमिक हैं, जिनके आराम के लिए रेस्ट सेल्टर की कोई व्यवस्था नहीं है। एक कमरे को रेस्ट सेल्टर बताया गया पर सिर्फ पल्ली के प्रभारी इसका उपयोग करते हैं। दोनों खदान में कर्मचारियों के लिए बने शौचालय में पानी, बिजली, एग्झास्ट फैन साफ सफाई की व्यवस्था नहीं है। बिल्डिंग क्षतिग्रस्त तथा  उपयोग में नहीं है। गायत्री खदान का रेस्ट सेल्टर में साफ सफाई, पानी की व्यवस्था नहीं है। सीलिंग पंखे में प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। रेहर, गायत्री, केतकी खदान के लिए अलग-अलग एम्बुलेंस है परन्तु सिर्फ एक कॉमन ड्राइवर ही नियुक्त है। वेलफेयर सदस्य ने निरीक्षण रिपोर्ट एसईसीएल के निदेशक कार्मिक को प्रेषित करते हुए त्वरित निराकार की मांग की है।

Categorized in: