बिश्रामपुर क्षेत्र के गायत्री खदान में नियमों की अनदेखी, अवैध कमाई का खेल
बिश्रामपुर। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र में प्रबंधन के कुछ अधिकारियों पर डीओ होल्डरों से मिलीभगत कर नियम विरुद्ध कार्य करते हुए कंपनी को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि रोड सेल व्यवस्था में डीओ होल्डरों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी नियमों को दरकिनार किया जा रहा है, जिससे कंपनी को दोहरा नुकसान हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार, कोल इंडिया प्रबंधन द्वारा सरकार के निर्देश पर सभी खदानों में माइनस 100 एमएम साइज का कोयला आपूर्ति करने का स्पष्ट प्रावधान है। इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, कोयला चोरी पर रोक और बिजली संयंत्रों के लिए उपयुक्त क्रश कोल की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
इसके बावजूद बिश्रामपुर क्षेत्र की गायत्री खदान, जहां बीते तीन वर्षों से निजी कंपनी गैंनवेल द्वारा कोयला उत्पादन किया जा रहा है, वहां इस नियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
फीडर ब्रेकर में कथित ‘कलाकारी’
आरोप है कि खदान प्रबंधन और क्षेत्रीय अधिकारियों की मिलीभगत से फीडर ब्रेकर में कलाकारी कर माइनस 100 एमएम की जगह 250 एमएम साइज का कोयला तैयार किया जा रहा है। इस बड़े साइज के कोयले को रोड सेल के माध्यम से  डीओ होल्डरों को स्टीम कोयले के रूप में आपूर्ति किया जा रहा है, जबकि डीओ में स्पष्ट रूप से माइनस 100 एमएम कोयला देने के निर्देश दर्ज है।
बताया जाता है कि इसके एवज में डीओ होल्डरों से खदान प्रबंधन द्वारा कथित तौर पर मोटी सुविधा शुल्क की वसूली की जा रही है। चूंकि कुल उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत स्टीम कोयला निकलता है, इसलिए इस ओर लंबे समय से किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
लालच में दोहरा नुकसान
नियम विरुद्ध स्टीम कोयला उत्पादन का सबसे बड़ा दुष्परिणाम कोयला चोरी के रूप में सामने आ रहा है। खदान के स्टॉक से रोजाना सैकड़ों टन कोयला चोरी खुलेआम हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रतिदिन 80 से 90 टन या उससे अधिक कोयला कोल स्टॉक से स्टीम कोयला बोरे में भरकर खदान के आसपास तस्करों को बेच रहे हैं। यही कोयला ईंट भट्ठों, होटलों, ढाबों और छोटे कारखानों में बेखौफ खपाया जा रहा है।
खदान से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि सारा कोयला नियमानुसार क्रश कर माइनस 100 एमएम में बदला जाए तो चोरी की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकती है, लेकिन ऐसा करने से कथित अवैध कमाई का रास्ता बंद हो जाएगा।
निजी कंपनी को भी लाभ
इस कथित व्यवस्था से कोयला उत्पादन कर रही निजी कंपनी गैंनवेल को भी फायदा होने की बात सामने आ रही है। नियम विरुद्ध बड़े साइज का कोयला निकालने से कंपनी को क्रशिंग पर समय और खर्च नहीं करना पड़ता, जिससे वह बचे समय में अतिरिक्त उत्पादन कर मुनाफा कमा रही है।
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में खदान प्रबंधन और निजी कंपनी के अधिकारियों के बीच भी आपसी सेटिंग है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
बताया जाता है कि रोड सेल के माध्यम से कोयला आपूर्ति में खदान प्रबंधन की विशेष रुचि रहती है और डीओ होल्डरों व लिफ्टरों से कथित सेटिंग के जरिए हर माह मोटी रकम की उगाही होती है, जो ऊपर से नीचे तक बंटती है।
स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है, ताकि नियमों की अनदेखी, अवैध कमाई और कंपनी को हो रहे नुकसान की सच्चाई सामने आ सके।
इस संबंध में क्षेत्रीय महाप्रबंधक डॉ संजय सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा है तो ये गलत है इसकी वे जांच कराएंगे।

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