प्रशासन 7 दिन में सौंपेगा रिपोर्ट

बीजापुर। जिले के गंगालूर गांव में स्थित एक ‘पोर्टा केबिन हाई स्कूल’ के छात्रावास की तीन छात्राओं के गर्भवती होने के मामले में जिला प्रशासन ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। चार सदस्यों वाली जिलास्तरीय जांच समिति बीजापुर के अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित की गई है। इस समिति को निर्देश दिया गया है कि वह सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपे। जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस समिति का गठन मीडिया रिपोर्टों की जांच के लिए किया गया है। इन रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बीजापुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले गंगालूर स्थित ‘पोर्टा केबिन हाई स्कूल’ के छात्रावास की तीन छात्राएं गर्भवती हैं-जिनमें से कुछ कथित तौर पर तीन महीने की गर्भवती हैं, तो कुछ पांच महीने तक की।

सात दिन के अंदर प्रस्तुत करना होगा रिपोर्ट
इस समिति के अन्य सदस्यों में आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त, बीजापुर के जिला शिक्षा अधिकारी और जिला अस्पताल की सिविल सर्जन डॉक्टर रत्ना ठाकुर शामिल हैं। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि समिति इस मामले की विस्तृत जांच करेगी तथा सात दिनों के भीतर अपने स्पष्ट निष्कर्षों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

विपक्ष ने सरकार पर लगाया मामला दबाने का लगाया आरोप
इससे पहले, दिन में राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि गंगालूर स्थित छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने वाली तीन नाबालिग छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं, और राज्य सरकार इस घटना को दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस विधायकों ने दावा किया कि जैसे ही यह खबर सामने आई, उन तीनों छात्राओं को उनके घर वापस भेज दिया गया और बाद में अधिकारियों ने यह बयान दिया कि वे छात्राएं छात्रावास में अनुपस्थित थीं।

शिक्षा मंत्री ने दी सफाई
इन आरोपों का जवाब देते हुए, राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि उन तीन छात्राओं में से दो छात्राएं छात्रावास में नहीं रहती थीं। वे ‘स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल’ में नामांकित थीं और प्रतिदिन अपने घर से ही स्कूल आती-जाती थीं। उन्होंने बताया कि तीसरी छात्रा पहले गंगालूर स्थित ‘पोर्टा केबिन हॉस्टल’ में ही रहती थी- दीपावली की छुट्टियों के दौरान 18 अक्टूबर, 2025 को अपने घर चली गई थी और उसके बाद वह वापस नहीं लौटी। मंत्री ने कहा कि छात्रा के परिवार से संपर्क करने पर अधिकारियों को पता चला कि उसने अपनी मर्जी से छात्रावास छोड़ा था और वह कहीं और रहने लगी थी। प्रशासन द्वारा उसे छात्रावास से नहीं निकाला गया था। हालांकि, मंत्री ने छात्राओं के गर्भवती होने से जुड़े दावों के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की।

Categorized in: