रोमी सिद्दीकी

अम्बिकापुर/ /  छत्तीसगढ़ प्रदेश के मंत्रियों में नम्बर दो के स्थान में आने वाले अमरजीत भगत एक ऐसा नाम है जिसे हर कोई जनता एवं पहचानता है हर किसी को गले लगाने में माहिर अमरजीत भगत संबंध निभाने में आज भी आगे रहते हैं अपनो को हजार के भीड़ में भी खोजने की इनमें जो महारत है वैसा बिरले ही मिलते है….धार्मिक प्रवृत्ति इतना है कि बिना पूजा पाठ के बिना  पानी नहीं पीते वही कही भी जाये राह में पड़ने वाले हर मंदिर में रुक कर शीश झुकाकर कर आगे बढ़ते हैं आदिवासी समाज से आने वाले श्री भगत में संस्कृति व खान पान, शिष्टाचार की झलक स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है……

बेहद साधारण आदिवासी परिवार से आने वाले कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत का सरगुजा युवा कांग्रेस (ग्रामीण )अध्यक्ष से विधायक फिर मंत्री तक का सफर काफी संघर्ष भरा हुआ रहा है…. अविभाजित सरगुजा के जयनगर के ग्राम पार्वतीपुर   अंतर्गत आने वाले गांव में इनका पुश्तैनी घर है पिता एसईसीएल में लोडर के पद पर कार्यरत थे माता गृहणी… इनके बचपन के मित्रों की माने तो अमरजीत भगत की शिक्षा स्कूल से लेकर कॉलेज तक अम्बिकापुर में ही हुआ है स्कूल के समय आज के कमिश्नर कार्यालय जो कभी छात्रावास हुआ करता था वहा रहे इसके बाद पीजी कालेज के बापु छात्रावास

में  ये रहकर अध्ययन किये

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*नेतृत्व क्षमता बाल्यकाल से ही….

 कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत के सहपाठी रहे वर्तमान में जशपुर में पदस्थ एडिशनल ट्रेजरी ऑफिसर बताते हैं अमरजीत स्कूल के समय से ही एक नेता के समान थे वे हमेशा ही अपने दल के साथ रहते थे चाहे वो स्कूल हो या छात्रावास उनके दल में राजेश वर्मा भी थे जो आज उनके निजी सहायक है. वे बताते हैं कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के साथ वे हमेशा मधुर संबंध स्थापित करते हुए उनके समस्याओं को सामने रखते थे लेकिन किसे पता था दुबला पतला सांवला सा लड़का एक दिन प्रदेश का मंत्री बनेगा….

*जनपद सदस्य से विधायक तक का सफर……….

कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत का आज का जलवा देख कर आज भले ही कुछ लोग कुछ भी कहे लेकिन कैबिनेट मंत्री तक के सफर में अमरजीत भगत ने जितना संघर्ष किया है वह युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा के समान है छत्तीसगढ़ बनने से पहले जब अमरजीत भगत युवा कांग्रेस में थे तो इनको अपने परिवार की जिम्मेदारी उठाते हुए राजनीति भी करना था दोनों दायित्वों को उन्होंने पूरा करते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ते रहे….. अविभाजित मध्यप्रदेश के समय श्री भगत ने जनपद पंचायत सूरजपुर सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए. यही नहीं आम कार्यकर्ताओं की तरह पार्टी के कार्यक्रमों में झंडा, बैनर लगा कर आज ये मुकाम हासिल किये है…

छत्तीसगढ़ बनते ही किस्मत भी बदली………

वर्ष 2000 में जैसे ही छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया और प्रदेश की कमान बतौर मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद जोगी के हाथ सौंपा गया वैसे ही मानो कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत का किस्मत भी करवट लिया.तब के मुख्यमंत्री अजीत जोगी से नजदीकी का लाभ इन्होंने हर जगह उठाया. मुख्यमंत्री के आवभगत में प्रथम पंक्ति में होने कारण इसका लाभ पहले अमरजीत भगत को युंका अध्यक्ष के रूप में मिला इसके पश्चात विधानसभा चुनाव 2003 के ठीक पहले राजनीति उलटफेर के बीच सीतापुर विधानसभा का टिकट यही नहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अमरजीत भगत को विधानसभा में जीत दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया अंततः 2003 विधानसभा चुनाव में अमरजीत भगत सरगुजा संभाग में एकलौता कांग्रेस के विधायक जीते. इसके बाद अमरजीत भगत फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखे….

*वक्त की नजाकत को पहचानने की काबिलियत……*

कैबिनेट मंत्री अमरजीत भगत के बारे में यह भी कहा जाता है कि ये अपने परस्पर विरोधियों पर बराबर नजर रखते हैं और कभी भी उनको जबाब नही देते बल्कि सही वक़्त का इंतजार करते हुए उनको एहसान तले दबा देते हैं.तो दूसरी और अपने करीबियों को समय पर आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते यही कारण है कि इनसे जुड़ने वालों की भीड़ दिनों दिन बढ़ती जा रही है…

अंततः हम कह सकते हैं एक साधारण आदिवासी परिवार से आने वाले अमरजीत भगत के पास आज जो कुछ भी है ये उनका खुद की अथक परिश्रम का परिणाम है यही कारण है सरगुजा की जनता इन्हें भूमिपुत्र कह कर संबोधित करती है और श्री भगत भी अपने पास से किसी को खाली हाथ नहीं लौटाते है………..

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