अम्बिकापुर। स्कूलों में मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोईयों द्वारा अब उचित मानदेय को लेकर देश व्यापी आंदोलन प्रारंभ करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके लिए रसोईयों के राष्ट्रीय संगठन द्वारा 12 जून को दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देने की तैयारी की जा रही है।

आज इस संबंध मंे जानकारी देते हुए रसोईया संघ की पदाधिकारी यशोदा साहू व प्रदेश संरक्षक मो0 अख्तर ने बताया कि वर्ष 1995 में प्रारंभ की गई मध्यान्ह भोजन योजना के प्रारंभ मंे रसोईयों को 300 रूपये मानदेय मिलता था जिसे बढ़ाते हुए 1500 किया गया था रसोईयों के आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री ने इसमें 300 की और बढ़ोत्तरी की और फिर भी संगठन के पदाधिकारियों द्वारा जाकर मुख्यमंत्री से भेंट करने पर इसमें 200 रूपये का और इजाफा किया गया।

वर्तमान में रसोईयों को छ.ग. में 2000 रूपये मानदेय मिल रहा है परन्तु रसोईयों का स्कूल मंे काम 5 से 6 घंटे का होता है वहीं इस महंगाई के दौर मंे इतने कम मानदेय से रसोईयों का गुजारा होना मुश्किल है। रसोईयों को मिलने वाले मानदेय में 75 प्रतिशत केन्द्र सरकार से और 25 प्रतिशत राज्य सरकार से प्राप्त होता है। ऐसे में रसोईयों ने भी अन्य राज्यों की तरह यहां मानदेय बढ़ाने की मांग की है।

रसोईया संघ का कहना था कि उन्हें 18000 रूपये मासिक वेतन प्रदान किया जाना चाहिए। पूर्व मंे हाईकोर्ट द्वारा भी रसोईयों को 9182 रूपये देने के लिए कहा जा चुका है परन्तु इसके बाद भी उनका मानदेय नहीं बढ़ाया गया। रसोईया संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2014 मंे कांग्रेस सरकार द्वारा मानदेय बढ़ाने के लिए लोकसभा मंे बिल पारित किया गया था परन्तु सरकार बदलने के बाद उसपर भी अमल नहीं हुआ और मोदी सरकार द्वारा एक बार भी उनके मानदेय को बढ़ाने की दिशा मंे कोई कार्यवाही नहीं की गई।

अब रसोईया संघ ने भी राष्ट्रीय स्तर पर इसे लेकर आंदोलन प्रारंभ करने की तैयारी शुरू कर दी है इसके लिए बरेली से 6 जून को यात्रा प्रारंभ की गई है जो 11 जून को राजघाट पहुंचेगी जिसके बाद अगले दिन 12 जून को राष्ट्रीय राजधानी में जंतर मंतर के पास देशभर से पहुंचे रसोईयों द्वारा धरना दिया जाएगा। इसमंे शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ से भी 500 रसोईये जाऐंगे। अगर इसके बाद भी सरकार कोई कार्यवाही नहीं करती है तो 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद अनिश्चित कालीन आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा। रसोईयों ने चुनाव मंे सरकार को सबक सिखाने की भी बात कही है।

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