आतंकी हमला: मारे गए छत्तीसगढ़ के मजदूरों के परिवार को 20-20 लाख की मदद

रायपुर – – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले में श्रमिकों की मौत पर दुख जताया है. उन्‍होंने कायराना हमले में जान गंवाने वाले सक्ती जिले के दीपक रात्रे और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के निवासी भूपेंद्र भैना के निधन पर शोक व्यक्त किया है.साथ ही उनके परिवारों को 20-20 लाख रुपये की मदद करने का भी ऐलान किया गया है. आइए, सबसे पहले जानते हैं आतंकी हमले में मारे गए मजदूर कौन थे?

घर में इकलौता कमाने वाला था दीपक
दरअसल, छत्तीसगढ़ के गांवों से गरीबी के कारण रोजगार की तलाश में दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना बेहतर भविष्य का सपना लेकर जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे. जहां केलम क्षेत्र में स्थित ईंट-भट्ठे पर आतंकियों ने गोली मारकर उनकी हत्‍या कर दी. अब सिर्फ उनके शव ही घर लौटेंगे. मालखरौदा पुलिस थाना इलाके के बुंदेली गांव के रहने वाले चाचा हलधर रात्रे ने बताया कि दीपक रात्रे (24) अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था.

दीपक की शादी कुछ साल पहले हुई थी, उसके परिवार में उसकी पत्नी और चार महीने का बेटा है. बेहतर भविष्य की उम्मीद में सात-आठ महीने पहले वह अपनी पत्नी के साथ जम्मू-कश्मीर गया था.दीपक के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है, उसका छोटा भाई दिव्यांग है.  दीपक की मौत के बाद मां और भाई का रो-रोकर बुरा हाल है.

तीन महीने पहले मजदूरी करने गए थे भूपेंद्र भैना
आतंकी हमले में जान गंवाने वाले दूसरे मजदूर भूपेंद्र भैना सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुइया गांव के रहने वाले थे. 28 साल के भैना 3-4 महीने पहले पत्नी के साथ ईंट-भट्टे पर काम करने के लिए जम्मू-कश्मीर में गए थे. उनका चार साल का बेटे, मां और  नाबालिग बहन गांव में ही रह रही थी. सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा के अनुसार उनके माता-पिता और छोटा भाई हिमाचल प्रदेश में ईंट-भट्टे पर मजदूरी करते हैं.

‘सरकार परिवारों के साथ खड़ी’
मुख्यमंत्री साय ने इस जघन्य और अमानवीय आतंकी घटना की कठोर शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना मानवता के विरुद्ध अपराध है और ऐसे कायराना कृत्य किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं. उन्‍होंने कहा क‍ि इस दुख की घड़ी में प्रदेश  सरकार शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता और मजबूती से खड़ी है. मुख्यमंत्री साय ने घोषणा की कि राज्य सरकार की ओर से दोनों दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी.इसके अलावा जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी. यह राशि जिला प्रशासन की ओर से दी जाने वाली 6-6 लाख रुपए की तत्काल सहायता से अलग होगी.

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