पुलिस ने 31 लाख का सामान नहीं, 129 लोगों का भरोसा वापस लौटाया

अंबिकापुर। डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा के दिशा-निर्देशन में साइबर सेल अंबिकापुर और जिले की समस्त थाना/चौकी पुलिस टीम ने गुम मोबाइलों की बरामदगी के लिए विशेष अभियान चलाया। अभियान के तहत पिछले 5 महीने में कुल 129 नग गुम मोबाइल बरामद कर उनके असल मालिकों को वापस सौंपे गए। बरामद मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 31 लाख रुपये है। उपस्थित लोगों ने पुलिस टीम की तकनीकी दक्षता, समन्वय और सतत प्रयासों की प्रशंसा की।

पुलिस लाइन स्थित सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डीआईजी एवं एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल द्वारा मोबाइल धारकों को मोबाइल के साथ उनकी खुशियां लौटाई गईं। मोबाइल पाकर जहां एक वृद्ध महिला के चेहरे में मुस्कान उभर आई, वहीं ग्रामीण अन्य लोगों की खत्म हो चुकी उम्मीद मोबाइल के साथ वापस मिली। इस मौके पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मोबाइल धारकों को साइबर अपराधियों से बचने के लिये टिप्स बताए, ताकि वे जाने-अनजाने में ऐसे अपराधियों के चंगुल में आने से बच सकें, और त्वरित पुलिस के संज्ञान में ऐसे मामलों को लाएं। कार्यक्रम में एएसपी अमोलक सिंह ढिल्लो, एसडीओपी ग्रामीण तुल सिंह पट्टावी, रक्षित निरीक्षक तृप्ति सिंह राजपूत, थाना प्रभारी कोतवाली शशिकान्त सिन्हा, गांधीनगर प्रवीण कुमार द्विवेदी, साइबर सेल प्रभारी एएसआई अजीत मिश्रा, आरक्षक अनुज जायसवाल, अमित विश्वकर्मा, रिंकू गुप्ता, अशोक यादव, अमित विश्वकर्मा, वीरेंद्र पैकरा, उमाशंकर साहू, रमेश राजवाड़े, राहुल केरकेट्टा सहित पुलिस टीम मौजूद रही।

तकनीकी माध्यमों से किया मोबाइल ट्रैक

बता दें कि, जिले के विभिन्न थाना, चौकी में गुम मोबाइल की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लो और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल के नेतृत्व में साइबर सेल ने सर्विलांस और तकनीकी माध्यमों से मोबाइल ट्रैक किया। अधिकतर मामले बाजार, सब्जी मंडी, चौक-चौराहे, यात्रा और मंदिरों के आसपास से सामने आए थे। नागरिकों ने थाना, चौकी और भारत सरकार के सीईआईआर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस गुम मोबाइल की खोजबीन को लेकर वैधानिक जांच, कार्रवाई में निरंतर लगी थी। सरगुजा पुलिस ने फरवरी 2026 में भी 525 नग गुम मोबाइल बरामद कर वास्तविक मोबाइल धारकों को सुपुर्द किया था।

साइबर जागरूकता और पोलिस की-वर्ड

कार्यक्रम में डीआईजी राजेश कुमार अग्रवाल ने नागरिकों को साइबर ठगी से बचाव के तरीके बताए और पोलिस की-वर्ड की जानकारी दी। उन्होंने पोलिस के एक-एक इंग्लिश लेटर को परिभाषित करते हुये बताया कि ‘पी-पासवर्ड’ पासवर्ड मजबूत और गोपनीय रखें, किसी से साझा न करें। ‘ओ-ओटीपी’ कभी भी ओटीपी बैंक, पुलिस या रिश्तेदार के नाम पर मांगने पर भी न बताएं। ‘एल-लिंक’ अनजान ईमेल/एसएमएस के लिंक पर क्लिक न करें। ‘आई-आइडेंटिफिकेशन’ आधार, पैन, वोटर आईडी की फोटो सोशल मीडिया पर न डालें, दुकान में मूल कॉपी न छोड़ें। ‘सी-केयरफुल’ व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें, लालच में न आएं, बैंकिंग काम स्वयं बैंक जाकर करें। ‘ई-इमरजेंसी’ साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या नजदीकी पुलिस स्टेशन/साइबर सेल से संपर्क करें। ‘रुको, सोचो और कार्रवाई करो’ का स्लोगन अपनाएं।

पुलिस टीम के सामूहिक प्रयास का प्रतिफल

डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल ने मोबाइल धारकों को संबोधित करते हुए कहा कि कई मोबाइल धारकों को मोबाइल गुमने के पश्चात वापस मिलने की उम्मीद नहीं होती है, लेकिन पुलिस टीम के सामूहिक प्रयास से गुम मोबाइल खोजकर वापस दिलाया जा रहा है। उन्होंने कहा मोबाइल धारक अपने मोबाइल को संभाल कर रखें, स्वयं सचेत रहें एवं दूसरों को भी सचेत करें। मोबाइल में हर किसी की कई गोपनीय एवं महत्वपूर्ण जानकारी रहती है। मोबाइल गुमने पर इन जानकारियों का गलत एवं मनमाना तरीके से उपयोग कर साइबर ठगी जैसी घटनायें कारित की जाती  हैं। उन्होंने मोबाइल वापस पाने वाले धारको को शुभकामनायें दी। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसा अभियान चलाकर गुम मोबाइल असल मालिकों को सौंपे जाएंगे।

राहवीर योजना और अवैध प्रवासी टोल फ्री नंबर

इस दौरान राहवीर योजना की जानकारी देते हुये एसएसपी ने बताया कि, दुर्घटना में घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को शासन के द्वारा 1 महीने के अंदर 25 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अवैध प्रवासियों की सूचना के लिए टोल फ्री नंबर 18002331905 और सरगुजा पुलिस हेल्पलाइन 9479193599 या डॉयल 112 पर सूचना देने की अपील की गई। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

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