गिरिजा  ठाकुर

अंबिकापुर। आईपीएस बनने की तमन्ना लिए गार्ड की नौकरी करके शहर में ग्रामीण क्षेत्र का एक युवक यूपीएससी की तैयारी कर रहा है। उसकी यह तैयारी किसी कोचिंग संस्थान में नहीं बल्कि दुकान की दहलीज पर होती है, जहां वह निजी सुरक्षा गार्ड बतौर सेवा देता है। सदर रोड से गुजरते वक्त ज्वेलरी दुकान के सीढ़ी को टेबल बनाकर कॉपी-किताब लिए बैठा 20 वर्षीय एक युवक चालू मार्ग होने के बाद भी रास्ते से आने-जाने वालों की परवाह किए बगैर अध्ययन में लीन रहता है। मेरी नजर पिछले पांच दिनों से इस युवक पर टिकी थी, लेकिन मैं उसे नजरअंदाज करते निकल जाता था। शुक्रवार को भी पुन: उस पर नजर फेरते स्कूल रोड गुरुनानक चौक तक मैं पहुंचा, लेकिन युवक का रोज सीढ़ियों के करीब गार्ड के ड्रेस में बैठकर लिखापढ़ी का परिदृश्य नजरों से नहीं हट रहा था और मैंने मोटरसाइकिल का रुख वापस सदर रोड की ओर कर दिया। मेरी दोपहिया सीधे युवक के पास जाकर रुकी। वह मेरी ओर मुड़कर मुस्कुराते हुए देखने लगा। मैं जब गम्भीर होकर दोस्त संबोधित करते हुए चर्चा का क्रम शुरू किया और अपना परिचय पत्रकार के रूप में दिया, तो वह सर संबोधित करते हुए कुर्सी से उठने लगा। मैंने उसे बैठे रहने के लिए कहा और बताया पिछले पांच दिनों से मैं तुम्हें यहां पढ़ते देख रहा था, लेकिन डिस्टर्ब न हो सोंचकर गुजर जाता था, लेकिन आज मैं खुद को रोक नहीं पाया। बातों का सिलसिला शुरू हुआ और उसने निजी सुरक्षा कम्पनी में गार्ड की नौकरी करके रुपये जमा होने पर यूपीएससी की तैयारी करने के लिए बाहर जाने के मनोभाव को व्यक्त किया। उसने कहा कि वह आईपीएस बनना चाहता है। उम्रदराज पिता के पास इतनी पूंजी नहीं है कि वह घर बैठकर और अच्छे कोचिंग संस्थान में जाकर अपनी तमन्ना को पूरी कर सके, इसलिए ड्यूटी के साथ रात पढ़ाई करते गुजार देता है।


12 घंटे ड्यूटी के बाद रोजाना का काम निपटाकर जाता है कॉलेज
कहते हैं जज्बा और जुनून हो तो लाख मुश्किलों के बाद भी इंसान अपनी मंजिल को पा सकता है। ऐसा ही कुछ जज्बा सूरजपुर जिला के शिवप्रसादनगर निवासी शिव कुमार कुशवाहा पिता रामेश्वर कुशवाहा, माता तारा बाई कुशवाहा में देखने को मिला। वर्तमान में वह नियमित बीएससी द्वितीय वर्ष की पढ़ाई पीजी कॉलेज अंबिकापुर में करने जाता है। कुछ देर आराम करने के बाद शाम छह बजे जमुना अलंकार मंदिर में सुरक्षा गार्ड की सेवा देने के लिए कॉपी-किताब लेकर पहुंच जाता है। जब तक दुकान खुला रहता है, तब तक वह आने-जाने वाले ग्राहकों पर नजर रखता है। इसके बाद रात 9-9.30 बजे से दुकान की सीढ़ियों के पास बैठकर अध्ययन में लीन हो जाता है। शिव कुमार बताया कि शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक वह रोजाना ड्यूटी करता है। गार्ड की ड्यूटी करने से फायदा यह है कि बीच शहर में उसे पढ़ने के लिए रोशनी मिल जाती है और 12 घंटे की ड्यूटी के साथ उसकी पढ़ाई भी हो जाती है। ड्यूटी पूरी होने के बाद कुछ देर आराम करते खाना बनाता है और दिनचर्या से निवृत्त होकर कॉलेज में पढ़ाई के लिए रवाना हो जाता है। परिवार में चार बहनों के बीच वह इकलौता भाई है। तीन बहनों का विवाह हो चुका है, चौथे नंबर पर वह स्वयं है। छोटी बहन कक्षा 11वीं में पढ़ रही है। पिता बुजुर्ग हो चुके हैं, ऐसे में वह अपनी पढ़ाई और यूपीएससी की तैयारी के लिए बाहर जाने की तमन्ना लिए गार्ड की ड्यूटी करके रुपये जुटाने में लगा है, कुछ पैसे बहन की पढ़ाई व खर्च के लिए घर में दे देता है।

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