*न्यूरोसर्जन की कमी होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर से किया गया था रायपुर रेफर*
अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल को सुविधा, संसाधन से पूरित करने के प्रयास को धत्ता बताते हुए कुछ चिकित्सक स्वयं के निजी चिकित्सा संस्थान को चमकाने में रुचि ले रहे हैं। इनके एजेंट अस्पताल में सक्रिय रहते हैं, जो मरीजों को गुमराह कर ले जाते हैं। बेहतर इलाज का झांसा देकर गंभीर मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कराने का यह खेल पुराना है, जिस पर रोक लगाने की सार्थक पहल पूर्व चिकित्सा अधीक्षक ने की थी। वर्तमान में पुनः मरीजों को निजी चिकित्सा संस्थान में ले जाने और   इनसे इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूलने का गोरखधंधा शुरू हो गया है। मरीज की स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे पुन: मेडिकल कॉलेज अस्पताल का रास्ता दिखा दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला सरजपुर जिले के जोरबंजा के पीड़ित का सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक विजेन्द्र विश्वकर्मा सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था, उसे सिर में गंभीर चोट लगी थी। स्वजन उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती कराए। यहां चिकित्सकों ने इलाज शुरू किया।  सिर में गंभीर चोट लगने के कारण न्यूरोलॉजिस्ट की जरूरत थी। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट की कमी के कारण चिकित्सक ने बेतहर इलाज के लिए उसे रायपुर रेफर कर दिया। स्वजन उसे रायपुर ले जाने की तैयारी में थे, इसी बीच मरीज के स्वजनों के पीछे शहर के एक निजी अस्पताल का एजेंट पीछे लग गया और रायपुर से बेहतर अंबिकापुर के ही निजी अस्पताल में इलाज कराने का झांसा देकर इन्हें लेकर चला गया। यहां चिकित्सकों ने रुपये के लोभ में आकर गंभीर मरीज का इलाज शुरू कर दिया, जबकि उक्त अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट नहीं थे। यहां उसका पांच दिनों तक इलाज चला। इस बीच उससे 55 हजार रुपये वसूल लिए गए। इसके बाद भी मरीज की स्थिति में कोई सुधार नहीं होने पर निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने इसे पुन: मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया। परेशान स्वजन गंभीर मरीज को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे, फिर पहले ही रेफर किए गए पीड़ित को रायपुर लेकर रवाना हुए।
*स्वजनों ने कहा-झूठ बोलकर ले गए निजी अस्पताल*
अस्पताल प्रबंधन मामले को लेकर जवाब देने की स्थिति में नहीं है, वहीं स्वजन महेंद्र प्रसाद, लीलावती, इंद्रावती विश्वकर्मा का कहना है, सूरजपुर जिले के केंवरा में हुई दुर्घटना के बाद घायल विजेंद्र को वे भैयाथान अस्पताल ले गए, यहां से रेफर करने पर सूरजपुर जिला अस्पताल पहुंचे, यहां से अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। यहां से मरहम पट्टी के बाद सिर में चोट होने के कारण रायपुर रेफर किया गया। वे रायपुर जाने की तैयारी में थे, तभी निजी अस्पताल का एक आदमी उनके पीछे पड़ गया। इसके झांसे में आकर रायपुर जाने के बजाए वे इसी अस्पताल के डॉक्टर के निजी अस्पताल में पहुंच गए।
*स्मार्ट कार्ड से इलाज का दिया झांसा*
घायल विजेंद्र के स्वजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें झूठ बोलकर निजी अस्पताल ले जाया गया। कहा गया स्मार्ट कार्ड से इलाज होगा। एसी लगे वार्ड में मरीज को पांच दिन रखने के बाद छुट्टी कर देंगे। पांच दिन इलाज के बाद 35 हजार बेड चार्ज और 20 हजार दवा का वसूल लिया गया। सिर की चोट का इलाज किसी न्यूरोसर्जन ने नहीं किया। उन्हें कहा गया था कि अधिकतम 35 हजार खर्च होगा और मरीज ठीक हो जाएगा। इतना खर्च करने के बाद मरीज चल पाने की स्थिति में नहीं है। जैसे-तैसे इंतजाम करके 55 हजार रुपये उन्होंने दिया और  उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाने कह दिया गया।

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