कर्नाटक में मिली कांग्रेस पार्टी की जीत का असर हरियाणा कांग्रेस में भी दिखाई देगा। इस जीत का सबसे ज्यादा असर अगर किसी पर पड़ा है तो वह हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज चेहरों में शुमार राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला हैं। कर्नाटक में पार्टी प्रभारी होने के कारण दिल्ली में उनकी धमक बढ़ेगी। इससे हरियाणा कांग्रेस की संगठन लिस्ट पर भी असर पड़ेगा। संभावना है कि इस लिस्ट में शामिल कई नामों में बदलाव किया जाएगा।

सुरजेवाला का कद बढ़ने से जाहिर है पार्टी में बने दूसरे गुटों पर भी असर दिखाई देगा। सबसे ज्यादा असर पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा के गुट पर दिखेगा।

एक गुट दे रहा सुरजेवाला को जीत का श्रेय
कर्नाटक में मिली जीत का श्रेय हरियाणा में कांग्रेस पार्टी का एक गुट सुरजेवाला को दे रहा है। कैथल जिले में तो कार्यकर्ताओं ने खूब मिठाई भी बांटी हैं। इसकी खास वजह यह भी है कि यह रणदीप सुरजेवाला का गढ़ भी है। दबी जुबान में दूसरे गुटों के नेता भी कह रहे हैं कि इस जीत का श्रेय सुरजेवाला को ही जाता है। हालांकि हुड्‌डा गुट इसके लिए केंद्र विरोधी लहर को बता रहा है।

हरियाणा कांग्रेस में क्या पड़ेगा असर
सुरजेवाला का दिल्ली में कद बढ़ने से सबसे ज्यादा असर प्रदेश में पार्टी संगठन की लिस्ट में दिखाई देगा। केंद्रीय नेतृत्व को दी गई लिस्ट में अभी पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा का वर्चस्व बताया जा रहा है। यही कारण है कि केंद्रीय नेतृत्व ने अभी तक इस लिस्ट को जारी नहीं किया है। इसके अलावा अब 2024 में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व के फैसलों पर सुरजेवाला का हस्तक्षेप भी बढ़ेगा।

विरासत में मिली है राजनीति
रणदीप सुरजेवाला को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता स्व. चौधरी शमशेर सिंह सुरजेवाला कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं। कैथल विधानसभा से उनके पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला ने चुनाव लड़ा और जीता था। 2010 व 2015 में रणदीप सुरजेवाला कैथल से विधायक बने और मंत्री भी बने। हालांकि 2018 में सुरजेवाला को जींद उप-चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।

ओपी चौटाला को हरा चुके रणदीप
रणदीप सुरजेवाला नरवाना से दो बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि वह तत्कालीन INLD सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला से चुनाव हार भी चुके हैं। 2005 में रणदीप सुरजेवाला ने पूर्व CM ओमप्रकाश चौटाला को नरवाना विधानसभा से हराकर अपना बदला ले चुके हैं। इसके बाद से कैथल में कांग्रेस कार्यकर्ता व सुरजेवाला समर्थकों को खुशी मनाने का अवसर ही नहीं मिल पाया था। कर्नाटक में कांग्रेस के बहुमत की खबरें आने के बाद सुरजेवाला को संजीवनी मिली है।

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