रायपुर : रेल मंडल से जुड़े टिकट क्लर्क के खिलाफ आरपीएफ की कार्रवाई ने रेलवे टिकट व्यवस्था में दलालों की सक्रियता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंबिकापुर आरपीएफ की टीम ने भिलाई में पदस्थ टिकट क्लर्क एम वेनू अचारी को गिरफ्तार किया है। उस पर टिकट दलालों के संपर्क में रहकर तत्काल टिकट बनवाने में सहयोग करने का आरोप है।बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी से पहले कर्मचारी अपने वकील के साथ आरपीएफ थाने पहुंचा था। शुरुआती पूछताछ के दौरान उसने अपने बैंक खाते में हुए लेनदेन की बात स्वीकार की, लेकिन इन पैसों को निजी संबंधों से जुड़ा बताया।

पहले निजी लेनदेन की दी दलील

पूछताछ में आरोपी क्लर्क ने कथित तौर पर बताया कि टिकट दलाल की पत्नी और उसकी पत्नी आपस में सहेलियां हैं। इसी वजह से दोनों परिवारों के बीच पैसों का लेनदेन होने की बात उसने कही।हालांकि आरपीएफ की ओर से लेनदेन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के संबंध में विस्तार से पूछताछ किए जाने के बाद मामले की दिशा बदल गई। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में आरोपी ने टिकट दलाली से जुड़े होने की बात स्वीकार की।

गिरफ्तारी रोकने की कोशिश का भी दावा

सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए राजनीतिक संपर्कों का सहारा लेने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि उसने भाजपा के कई नेताओं से आरपीएफ अधिकारियों को फोन भी करवाए।हालांकि जांच टीम के पास मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आरपीएफ ने कार्रवाई जारी रखी और अंततः एम वेनू अचारी को गिरफ्तार कर लिया।

चार साल से टिकट दलाल के संपर्क में होने का खुलासा

आरपीएफ की पूछताछ में एक अन्य महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व में गिरफ्तार किए जा चुके टिकट दलाल प्रेम दुबे का संपर्क एम वेनू अचारी से वर्ष 2022 से था।बताया जा रहा है कि रायपुर रेल मंडल के जिस टिकट काउंटर पर क्लर्क की ड्यूटी लगती थी, वहां प्रेम दुबे सामान्य यात्री की तरह लाइन में लगकर टिकट बनवाता था। इसके बदले क्लर्क को अलग-अलग डिजिटल माध्यमों से भुगतान किए जाने का आरोप है।

पत्नी के खाते में हुए लेनदेन की भी जांच

मामले में डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि कथित लेनदेन के कुछ हिस्से टिकट क्लर्क की पत्नी के बैंक खाते में भी किए गए हैं।आरपीएफ इन सभी लेनदेन की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कितने टिकटों के मामले में कथित तौर पर क्लर्क और दलाल के बीच लेनदेन हुआ और इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

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