नार्मल स्कूल का वह ऐतिहासिक भवन जो अपने आप में चमकदार इतिहास को समेटे हुए है। इसी भवन से छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का शुभारंभ हुआ था। नार्मल स्कूल के बाद न्याय के मंदिर के रूप में इस भवन की पहचान बनी।

इतिहास गवाह है यह भवन अपनी भव्यता और विरासत के मामले में अपनी ख्याति दूर-दूर तक पहले ही अर्जित कर चुका है। इसी भवन से प्रदेश का पहला स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम महाविद्यालय का शुभारंभ हो रहा है। राज्य शासन के निर्देश पर इसकी तैयारी चल रही है। ऐतिहासिक भवन की अपनी विशिष्टता के साथ ही मौलिकता भी है। युवा अब इसी भवन ने भविष्य के सुनहरे सपने देखेंगे और अपना भविष्य गढ़ेंगे।

नार्मल स्कूल की अपनी प्रसिद्धी और नाम रहा है। 68 वर्षों की एक ऐसी चमकदार विरासत जिसने शहर को बड़े नाम वाली शख्सियतें दी। वर्ष 1932 में इसका स्थापना की गई थी। शिक्षा के उद्देश्य के लिए उस वक्त के लोगों की क्या सोच रही होगी। नार्मल स्कूल में लंबा शिक्षकीय कार्यकाल गुजार चुके शिक्षक पीआर यादव बताते हैं कि इसकी स्थापना वर्ष 1932 में की गई थी। वे वर्ष 1984 में यहां आए और वर्ष 2020 तक 36 वर्ष तक शिक्षक रहे।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्रामीण भारत के विचारों को आत्मसात कर इसका नाम बुनियादी प्रशिक्षण संस्था रखा गया था। यहां पढ़ाना ही उद्देश्य नहीं था बल्कि पढ़ाने के साथ कढ़ाई, चाक मिट्टी, टाटपट्टी आदि बनाने का काम भी कराया जाता था। उद्देश्य साफ था। पढ़ाई के साथ स्वरोजगार के साधनों की दिशा में विकल्प बढ़ाना और पढ़ते-पढ़ते इस दिशा में पूरी तरह पारंगत हो जाना। एक ऐसा स्कूल जो शुरुआत से ही बच्चों में स्वावलंबन की भावना जगाने का काम कर रहा था।
इस अंदाज में संचालित होता था स्कूल
भवन के पीछे मैदान में चाक मिट्टी, टाटपट्टी आदि की फैक्ट्री होती थी। इसके अलावा खेती बाड़ी का काम भी होता था। भवन के ऊपरी हिस्से में छात्रावास और नीचे कक्षा लगाई जाती थी। इसी भवन में सातवीं पास वालों को शिक्षकीय प्रशिक्षण दिया जाता था। शिक्षक पढ़ाने के साथ भवन के ऊपरी हिस्से में संचालित छात्रावास में रहते थे। प्रशिक्षण लेकर पढ़ाने वाले शिक्षकों को ड्रेस कोड में स्कूल आने की अनिवार्यता थी। सफेद टोपी कुर्ता पैजामा पहनकर शिक्षक अध्ययन अध्यापन के लिए स्कूल आते थे।
अब युवा लिखेंगे नई इबारत
स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल के प्रारंभ होने के बाद युवा अब नई इबारत लिखेंगे। पुराने हाई कोर्ट व अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय भवन को महाविद्यालय का स्वरूप देने के लिए अब नए सिरे से संवारा जा रहा है। जल्द यह भवन महाविद्यालय के स्वरूप में नजर आएगा। युवाओं को शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। अध्ययन अध्यापन के साथ अपना भविष्य गढ़ेंगे व करियर को ऊंची उड़ान देंगे।

Categorized in: