देश की कारों की सेफ्टी के लिए Bharat NCAP लॉन्च हो चुका है। 1 अक्टूबर से इस प्रोग्राम के तहत कारों की सेफ्टी चेक हो जाएगी। Bharat NCAP के शुरू होते ही ग्लोबल NCAP को बड़ा झटका लगा है। ग्लोबल NCAP ने कहा है कि वो अब भारत में बिकने वाली कारों का क्रैश टेस्ट नहीं करेगा। अभी उसके पास भारत के 10 कारें हैं जिनके क्रैश टेस्ट होने हैं। इसके बाद वो भारत में बिकने वाली कारों की टेस्टिंग बंद कर देगा। बता दें कि 2013 में ग्लोबल NCAP की शुरुआत हुई थी। इस टेस्ट के बाद कारों को सेफ्टी रेटिंग मिलती थी, जो इनकी सेल्स को बूस्ट करने का काम करती थी।

ऐसे होता है ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट
भारत में कार बेचने वाली सभी कंपनियों के लगभग सभी मॉडल का NCAP द्वारा क्रैश टेस्ट किया जाता है। टेस्ट के दौरान गाड़ी को तय स्पीड पर किसी ऑब्जेक्ट के साथ टकराया जाता है। इस टेस्ट के लिए कार में डमी का इस्तेमाल किया जाता है। डमी इंसान के जैसी होती है। टेस्ट के दौरान कार में 4 से 5 डमी का इस्तेमाल किया जाता है। बैक सीट पर बच्चे की डमी होती है। क्रैश टेस्ट के बाद कार के एयरबैग ने काम किया या नहीं? डमी कितनी डैमेज हुई? कार के सेफ्टी फीचर्स ने कितना काम किया? इन सब के आधार पर रेटिंग दी जाती है। ये भी देखा जाता है कि कार में एडल्ट और बच्चे कितने सुरक्षित रहे।

Bharat NCAP ऐसे काम करेगा

किसी कार को इस टेस्ट का हिस्सा बनाने के लिए मैन्युफैक्चर को व्हीकल मॉडल नॉमीनेट कराना होगा। Bharat NCAP टीम उस व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग फेसिलिटी का दौरा करेगी। टीम उस मॉडल बेस वैरिएंट को सिलेक्ट करेगी। उस सिलेक्ट किए गए व्हीकल को Bharat NCAP टेस्टिंग सेंटर में भेजा जाएगा। सिलेक्ट वैरिएंट का क्रैश टेस्ट की प्रोसेस को कार मैन्युफैक्चर और Bharat NCAP टीम के प्रतिनिधि के सामने किया जाएगा।

टेस्ट के रिजल्ट को कम्पायल्ड किया जाएगा। Bharat NCAP स्टैंडिंग कमेटी की मंजूरी के बाद कार कंपनी के साथ डिटेल को शेयर किया जाएगा। स्थाई कमेटी की मंजूरी के बाद उस गाड़ी की स्टार रेटिंग और क्रैश टेस्ट रिजल्ट Bharat NCAP द्वारा पब्लिश किया जाएगा। साथ ही, इसका सर्टिफिकेट केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (CIRT) द्वारा जारी किया जाएगा।

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