आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने धरना-प्रदर्शन करके हल्ला बोल

अंबिकापुर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका के संयुक्त मंच छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और कल्याण संघ के पदाधिकारियों व सदस्यों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर शुक्रवार, 8 नवम्बर को एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया, रैली निकाली और जमकर नारेबाजी करके हल्ला बोला। इसके बाद भी सरकार के कान खड़े नहीं हुए और मांगे पूरी नहीं हुई, तो भविष्य में उग्र प्रदर्शन करने का आगाज किया गया।
संघ की जिलाध्यक्ष भुनेश्वरी सिंह ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की मांगों को लेकर राज्य सरकार गंभीर नहीं है। शासन-प्रशासन के द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं पर कई काम थोपा जा रहा है, जिससे उनके ऊपर काम का दबाव बढ़ रहा है। लगातार काम करते आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं त्रस्त हो चुकी हैं। सारी जिम्मेदारियों का ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करने के बाद भी उनकी मांगों को लम्बे समय से अनसुना किया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं डोर-टू-डोर जाकर सर्वे सहित हितग्राहियों को परियोजना कार्यालय के माध्यम से दी जिम्मेदारी का निर्वहन करते आ रही हैं। पिछड़ा वर्ग सर्वे में भी अपनी भूमिका का निर्वहन की हैं। काम लेने के बाद भी उन्हें प्रोत्साहन राशि या अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जाता है। अपनी मांगों को लेकर शासन के जिम्मेदारों तक लगाई गई गुहार अभी तक थोथी ही साबित हुई है। ऐसे में कह की लड़ाई के लिए संघर्षरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। शुक्रवार को अंबिकापुर के कलेक्टोरेट ब्रांच स्टेट बैंक के सामने दिए गए धरना में काफी संख्या में जिले भर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और सहायिकाएं शामिल हुईं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ये है मांग
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की मांग है कि उन्हें शासकीय कर्मचारी घोषित नहीं करने तक 21 हजार रुपये मानदेय दिया जाए। मानदेय में प्रति वर्ष 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए। पर्यवेक्षकों की भर्ती की जाए, इसमें कार्यकर्ताओं को 50 प्रतिशत लाभ में योग्यता के आधार पर शत-प्रतिशत पर्यवेक्ष पद पर पदोन्नत किया जाए, या 50 प्रतिशत में आयुसीमा में छूट देते हुए 45 प्लस को विशेष अंक दिया जाए। परीक्षा विभाग के द्वारा ही ली जाए। सहायिकाओं के मानदेय में कार्यकर्ताओं के मानदेय से 80 प्रतिशत तक वृद्धि की जाए और कार्यकर्ता के पद पर सहायिकाओं को शत-प्रतिशत नियुक्ति दी जाए। आयु सीमा का बंधन हटाकर भर्ती नियम में संशोधन किया जाए। कार्यकर्ता और सहायिका को सेवा समाप्ति के बाद 10 लाख रुपये एकमुश्त राशि दी जाए। इसी क्रम में समूह बीमा योजना लागू करने, अनुकम्पा नियुक्ति, महंगाई भत्ता देने की भी मांग की गई है।
ड्रेस कोड की अनिवार्यता को समाप्त करें
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य करने को संघ की जिला अध्यक्ष ने अव्यवहारिक बताया। उन्होंने कहा कि किसी कारण वश ड्रेस पहन कर नहीं आने पर उस दिन का मानदेय काटा जाता है और बैठकों में ताना दिया जाता है। ड्रेस कोड की अनिवार्यता समाप्त होनी चाहिए या फिर 20 से 25 गांवों में जाकर केन्द्र का निरीक्षण करने वाले सुपरवाइजर के लिए भी ड्रेस कोड का निर्धारण हो। यदि शासन की ओर से कार्यकर्ताओं के लिए ड्रेस कोड की बाध्यता है तो उसके आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जाए। साथ ही अन्य विभाग के कर्मचारी, जिनके लिए डे्रस कोड अनिवार्य है, उनकी तरह प्रति माह धुलाई भत्ता, ब्लाउज पेटीकोट का सिलाई चार्ज भी स्वीकृत किया जाए। मानसेवी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं उसी गांव की नागरिक हैं, इन्हें पहचान के लिए ड्रेस कोड की जरूरत नहीं है।

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