*भूमि का सामुदायिक वन अधिकार पत्र वर्ष 2011-12 में ग्राम पंचायत को देना सामने आया*
भैयाथान। विकासखंड के ग्राम पंचायत खाड़ापारा में नौ लोगों का दो खसरा नंबर की लगभग 45 एकड़ भूमि का फर्जी पट्टा बनाने के आरोप पर एसडीएम सागर सिंह के निर्देश पर की गई जांच में सामने आया, जिनका नाम उक्त भूमि के रिकार्ड में दर्ज है, उनका कब्जा ही नहीं रहा है। तहसीलदार एवं राजस्व निरीक्षक ने ग्राम खाड़ापारा जाकर ग्रामीणों के समक्ष मौका मुआयना किया, इसके बाद कथित कब्जाधारकों के नामों का विलोपन करना बताया जा रहा है। फर्जी पट्टा की शिकायत ग्रामीणों के साथ जनपद सदस्य सुनील साहू ने एसडीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर की थी। हालांकि यह कार्रवाई खानापूर्ति मात्र लग रही है, क्योंकि 22 लोगों के नाम उक्त भूमि का वन अधिकार पत्र दिया जा चुका है। जबकि उक्त भूमि का अधिकार ग्राम पंचायत को कलेक्टर ने सौंपा है।
 तहसीलदार ने पत्रकारों को बताया कि एसडीएम के निर्देशन में मौके पर जाकर जांच कर ग्रामीणों से पूछताछ किया गया, इस दौरान जिन नौ लोगों का खसरा, बी-वन में नाम दिख रहा है उनका मौके पर कभी भी कब्जा नहीं होना सामने आया है। इसका विधिवत पंचनामा तैयार किया गया है। वहीं खसरा नंबर 81 रकबा 29.88 हे. व खसरा नंबर 123 रकबा 11.46 हे. का कलेक्टर द्वारा सामुदायिक वन अधिकार पत्र वर्ष 2011-12 में ग्राम पंचायत को दिया जा चुका है। एसडीएम से अनुमति लेकर नौ लोगों का नाम पुर्नविलोपन करते खसरा, बी-वन में उक्त भूमि को पूर्ववत करने की बात तहसीलदार ने कही। उन्होंने आगे बताया कि जिन नौ लोगों का रिकार्ड दुरुस्त किया गया था उनका प्रकरण तहसील न्यायालय में चलाया गया था। आवेदकों के पूर्वजों का नाम राजस्व अभिलेख 1954-55 में दर्ज होना पाया गया था, जिसके आधार पर उत्तराधिकारियों का नाम रिकार्ड में दुरुस्त करने का आदेश न्यायालय द्वारा दिया गया था। रिकार्ड दुरुस्ती आदेश के दौरान  वर्ष 2011-12 में सामुदायिक अधिकार पत्र ग्राम पंचायत को देने, इश्तिहार प्रकाशन के बाद भी किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं कराने के कारण 9 लोगों का रिकार्ड दुरुस्त हुआ। ग्रामीणों की शिकायत में यह बात सामने आई कि 2011-12 में ग्राम पंचायत को अधिकार पत्र प्राप्त हो चुका है, इसलिए तहसील न्यायालय के आदेश से नौ लोगों के नाम रिकार्ड में दर्ज किया गया था, उन्हें विलोपित करते हुए उक्त भूमि को पूर्ववत कर दिया गया है।
*उठ रहे ये सवाल*
मामले को लेकर शिकायत भले ही नौ लोगों का किया गया, पर इसी खसरा नंबर 81 व 123 का वर्ष 2011-12 में सामुदायिक अधिकार पत्र ग्राम पंचायत को दिया जा चुका है। दोनों खसरे पर वर्ष 2012-13 में लगभग 22 लोगों को वन अधिकार पत्र भी दिया गया है। जब दोनों खसरों के संपूर्ण रकबे का अधिकार ग्राम पंचायत के पास है, तो एक वर्ष बाद उस रकबे में 22 लोगों का वन अधिकार पट्टा मिलना कई सवालों को जन्म देता है। हालांकि तहसीलदार ने इन सभी पट्टों की भी जांच करने की बात कही है।
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