अंबिकापुर। सरकार की हठधर्मिता और नकारात्मक रवैये के कारण स्वास्थ्य विभाग के नियमित, संविदा एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी व अधिकारी और अधिक आक्रोशित हो गए हैं। स्वास्थ्य कर्मी वेतन विसंगति दूर करने, नियमितीकरण अथवा समान काम-समान वेतन प्रदान करने, एक वित्तीय वर्ष में तेरह माह का वेतन देने, चार स्तरीय पदोन्नत वेतनमान सहित 24 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, दूसरी तरफ विधानसभा के मानसून सत्र से पहले आयोजित मंत्रिमंडल के बैठक में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए कोई अच्छा निर्णय नहीं आने के कारण कर्मचारी और अधिक उग्र हो गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों ने चेतावनी दी है जल्द ही उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे आपातकालीन सेवाओं को ठप करके आंदोलन को और तेजी प्रदान करेंगे। इनका दावा है कि हड़ताल में होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों सहित शहरी क्षेत्रों में भी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हंै। मेडिकल कॉलेज में मरीज ज़्यादा संख्या में पहुंच रहे हैं। पीएचसी एवं सीएचसी में हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। चिकित्सक किसी तरह व्यवस्था बनाकर केवल मरीजों को उच्च सेंटर में रेफर करने का काम कर रहे हैं, जिसके कारण मरीज हलाकान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम, राष्ट्रीय फायलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, मलेरिया रोधी कार्यक्रम, डेंगू रोधी कार्यक्रम, संस्थागत प्रसव, राष्ट्रीय टीकाकरण, गर्भवती जांच, बीपी व शुगर की जांच, मलेरिया जांच, जल शुद्धिकरण आदि कार्यों की जिम्मेदारी उप स्वास्थ्य केंद्र, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की होती है, जो पूरी तरह से बाधित है। इस कार्य को संविदा एवं नियमित कर्मचारी संभालते हैं, जो अभी अनिश्चितकालीन हड़ताल में हैं।
बरसात का शुरूआती दौर सेहत के लिए ठीक नहीं
बरसात का शुरुआती कुछ दिन स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अभी कटहल, विषाक्त खुखड़ी, पुट्टू खाकर उल्टी-दस्त का शिकार होते हैं। ऐसे मामले सामने भी आने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल शुद्धिकरण नहीं होने के कारण भी उल्टी-दस्त के ज़्यादा मरीज़ देखने को मिल रहे हैं। मैनपाट एवं अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में लोग हड़िया शराब का सेवन करके भी बीमार हो रहे हैं। पिछले साल बरसात के मौसम में इन पर्वतीय क्षेत्रों में लोग विषाक्त खुखड़ी पुट्टू खाकर भारी संख्या में बीमार पड़े थे, जिसके रोकथाम में शासन-प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी, इस बार कोई भी इनकी सुध लेने वाला नहीं है।
डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा में कर्मचारी हड़ताल पर
जुलाई-अगस्त माह में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा उल्टी-दस्त से बचाव के लिए गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा कार्यक्रम चलाया जाता है इस बार कर्मचारियों के हड़ताल के कारण ये कार्यक्रम नहीं हो पाया, जिससे क्षेत्र के लोगों को जल शुद्धिकरण सहित ओआरएस वितरण सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाया। स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा है कि उनकी मांगें जब तक पूरी नहीं होगी, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। ऐसी स्थिति में दूरुस्थ ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधित गंभीर महामारी का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें जनहानि होने की भी संभावना है।
जिला अस्पताल पर पड़ेगा एकतरफा भार
जिले के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, हेल्थ वैलनेस सेंटरों के स्वास्थ्य कर्मचारियों के हड़ताल में डटे रहने से एकतरफा भार जिला अस्पताल पर पड़ने की उम्मीद अब बढ़ गई है। इसके पीछे कारण मरीजों को रेफर करने की मजबूरी है। पीएचसी, सीएचसी में पदस्थ डॉक्टर तो अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सहयोगी कर्मचारियों के हड़ताल में रहने से वे किसी प्रकार का रिस्क ना लेते हुए मरीजों, गर्भवती महिलाओं को रेफर कर रहे हैं। ऐसे हालात में दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को लेकर जिला अस्पताल अंबिकापुर लेकर आने स्वजन विवश हैं। यही स्थिति बनी रही तो मरीजों का भार मेडिकल अस्पताल पर बढ़कर रहेगा।

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