रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने प्रश्नपत्र लीक होने की घटना के बाद संबद्ध महाविद्यालयों में परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया है। अब विश्वविद्यालय से महाविद्यालयों तक प्रश्नपत्रों की हार्ड कॉपी नहीं भेजी जाएगी। इसके बजाय संबंधित प्राचार्यों के आधिकारिक ईमेल पर प्रश्नपत्र की सॉफ्ट कॉपी भेजी जाएगी।प्रश्नपत्र वाला ईमेल पासवर्ड से सुरक्षित रहेगा। प्राचार्य को ईमेल में लॉगिन करने के बाद प्रश्नपत्र खोलने के लिए अलग पासवर्ड की जरूरत होगी। यह पासवर्ड विश्वविद्यालय की ओर से केवल संबंधित प्राचार्य को उपलब्ध कराया जाएगा। ईमेल से प्राप्त प्रश्नपत्र का प्रिंट निकालकर परीक्षा में विद्यार्थियों को दिया जाएगा।
20 अगस्त की घटना के बाद लिया गया फैसला
यह नई व्यवस्था 20 अगस्त को बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की कीट विज्ञान परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद लागू की गई है। परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गया था। जांच आगे बढ़ने पर पहले आयोजित कुछ अन्य परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों के लीक होने की जानकारी भी सामने आई।विश्वविद्यालय ने अब आगामी परीक्षाओं के लिए अलग सुरक्षा रणनीति तैयार करने का फैसला किया है, ताकि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किसी अनधिकृत व्यक्ति तक न पहुंच सके।
जांच में सामने आया प्रोफेसर का नाम
पुलिस की जांच के अनुसार, इस मामले में भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में पदस्थ प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया को मुख्य आरोपी बताया गया है। पुलिस के मुताबिक वह करीब एक साल से रायपुर कृषि महाविद्यालय से उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र ले जाने की जिम्मेदारी से जुड़ा था।जांच के अनुसार 17 अगस्त को उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त किए। इसके बाद कीटशास्त्र परीक्षा के प्रश्नपत्र वाले लिफाफे को कथित तौर पर अपने घर ले गया।
लिफाफे में छेद कर मोबाइल से बनाया वीडियो
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने लिफाफे को बिना खोले प्रश्नपत्र तक पहुंचने के लिए उसमें छोटा छेद किया। इसके बाद मोबाइल कैमरे से प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। आरोप है कि इस सामग्री को उसने अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक को 11 हजार रुपये में बेच दिया।इसके बाद प्रश्नपत्र अन्य विद्यार्थियों और सोशल मीडिया ग्रुप्स तक पहुंच गया और परीक्षा से पहले ही वायरल हो गया। मामले में पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों की मदद से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की है।
100 से अधिक टीमों ने खंगाले डिजिटल साक्ष्य
प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच के दौरान पुलिस की 100 से अधिक टीमों ने डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। पुलिस के अनुसार मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।घटना के बाद विश्वविद्यालय परीक्षा विभाग और संबद्ध महाविद्यालयों की परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। परीक्षा केंद्रों और परीक्षा हॉल में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव आगामी बैठक में रखा जाएगा। इसके लिए आवश्यक बजट को भी मंजूरी दिए जाने की तैयारी है।
परीक्षा प्रक्रिया में अब बढ़ेगी निगरानी
विश्वविद्यालय ने संबद्ध महाविद्यालयों को परीक्षा से जुड़े सभी कार्यों में विशेष सावधानी और पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए हैं। नई ईमेल आधारित व्यवस्था का उद्देश्य प्रश्नपत्रों की आवाजाही कम करना और उनके वितरण पर नियंत्रण बढ़ाना है।पेपर लीक की घटना ने परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी सुरक्षा की जरूरत को सामने ला दिया है। अब विश्वविद्यालय डिजिटल माध्यम, पासवर्ड सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और परीक्षा संचालन में अतिरिक्त सावधानी के जरिए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की कोशिश कर रहा है।
