0 कलेक्टर को ज्ञापन, जांच व कार्रवाई की मांग
0 कार्रवाई के आभाव में आंदोलन की चेतावनी
सूरजपुर। जिले के दवनकरा स्थित आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के समिति प्रबंधक पर किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपा है। किसानों का आरोप है कि समिति प्रबन्धक संतोष नाविक ने कई किसानों के फर्जी हस्ताक्षर कर उनके खातों से लाखों रुपये का गमन किया है। शिकायत के बावजूद भी अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।जिससे किसानों में शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी है। कलेक्टर को सौपे ज्ञापन में किसानों ने आरोप लगाया है कि समिति प्रबंधक संतोष नाविक ने ग्राम पंचायत सेमराखुर्द के किसान राजाराम और बृजमोहन के नाम से धान बिक्री से संबंधित 154,500 रुपये की राशि को फर्जी हस्ताक्षर कर बैंक से आहरित कर लिया है। इस मामले की शिकायत चन्दौरा पुलिस थाना में भी की गई जिसमे एफआईआर भी दर्ज की गई। लेकिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे किसान बेहद निराश और परेशान हैं। वहीं ग्राम पंचायत केंवरा के किसान मंगलसाय के नाम से सहकारी बैंक प्रतापपुर से 106,250 रुपये का कर्ज निकाले जाने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, शिकायत के कुछ समय बाद उक्त कर्ज राशि किसान के खाते में वापस जमा कर दी गई, लेकिन इससे किसानों का विश्वास प्रशासन और बैंकिंग प्रणाली से उठ गया है।
0 खाद के नाम पर भी वसूली
किसानों का आरोप है कि उक्त समिति प्रबन्धक ने खाद वितरण के दौरान भी फर्जीवाड़ा किया है। उन्होंने किसानों से शेयर के नाम पर पैसे वसूले, लेकिन किसानों को कोई पावती नहीं दी गई। इस अवैध वसूली से किसानों को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ है।
0 फर्जी धान बिक्री और अन्य आरोप
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2019-20 में समिति प्रबंधक ने अपने नाम पर करीब 119 क्विंटल धान फर्जी तरीके से बेच दिया था। इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री जनदर्शन में की गई थी और जांच के दौरान यह आरोप सही पाए गए थे, लेकिन फिर भी अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा, इफको और यूरिया खाद वितरण में भी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया है। आरोप है कि विभाग के उच्चाधिकारी की मिलीभगत से मामले को रफादफा कर दिया गया। किसानों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच की जाती है तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है।
0कार्रवाई के आभाव में किसान करेंगे प्रदर्शन
किसान अब आंदोलन की धमकी दे रहे हैं और समिति प्रबंधक  को तत्काल हटाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समिति प्रबंधक को हटाया नहीं गया और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। धान खरीदी सत्र की शुरुआत में किसान पहले ही कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, और ऐसे में अगर उक्त प्रबन्धक समिति में बने रहे तो उन्हें और अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ज्ञापन में किसानों ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग की है। किसानों का कहना है कि वे अपनी मेहनत की फसल का उचित मूल्य प्राप्त करने के हकदार हैं, और प्रशासन को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

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