पिछले कई महीनों से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में भारी उछाल देखने को मिल रही थी। लेकिन, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की सब्सिडी में 1 जून 2023 से कमी होने के कारण बिक्री में काफी ज्यादा गिरावट आई है। मूल्य वृद्धि के कारण लोग ईवी टू-व्हीलर खरीदने से कतराने लगे हैं। बाजार विश्लेषकों और विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत सरकार द्वारा FAME II सब्सिडी को वापस लेने के कारण वाहन निर्माताओं ने कीमतों में बढ़ोतरी की है। एक रिपोर्ट की माने तो जून 2023 की बिक्री में 60 प्रतिशत की गिरावट आई है। मई 2023 में बेची गई 1,05,000 यूनिट्स की तुलना में 26 जून 2023 तक बिक्री का आंकड़ा 35,464 यूनिट तक गिर गया है।

जून 2023 में इलेक्ट्रिक टू व्हीलर की बिक्री में गिरावट

इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री पिछले 5 सालों में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है और उसी गति से आगे बढ़ने के लिए तैयार है। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ बिजली से चलने वाले दोपहिया वाहनों की लागत ने खरीदारों को इसकी ओर आकर्षित किया है।

कीमत में बढ़ोतरी और ओला इलेक्ट्रिक की बिक्री हुई कम

FAME II सब्सिडी में कमी आने के बाद सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन निर्माता को उच्च कीमतों का सहारा लेना पड़ा है। इससे बिक्री काफी कम हो गई। अग्रणी इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माता ओला इलेक्ट्रिक की बिक्री जून 2023 में घटकर 14,073 यूनिट्स रह गई, जो मई 2023 में 28,612 यूनिट्स थी और अप्रैल 2023 में 22,024 यूनिट्स थी।

हीरो इलेक्ट्रिक की बिक्री

हीरो इलेक्ट्रिक की बिक्री भी जून 2022 में बेची गई 6,486 यूनिट्स की तुलना में जून 2023 में गिरकर 970 यूनिट हो गई। टीवीएस मोटर्स, जो वर्तमान में इस सेगमेंट में आईक्यूब बेचती है, उसकी बिक्री भी जून 2023 में 20,396 यूनिट्स की तुलना में घटकर 5,253 यूनिट्स हो गई।

मई 2023 में एथर और एम्पीयर दोनों के साथ भी ऐसा ही था, जिनमें से प्रत्येक ने जून 2023 में महत्वपूर्ण बिक्री में गिरावट दर्ज की। चेतक इलेक्ट्रिक की बजाज ऑटो की बिक्री भी मई 2023 में बेची गई 10,063 यूनिट्स से घटकर जून 2023 में 2,100 यूनिट हो गई।

बिक्री को वापस पटरी पर लाने का प्लान

पूरे इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन सेगमेंट के सामने आने वाली इस समस्या का एकमात्र समाधान यह है कि सरकार अपनी रणनीतियों को पुन: व्यवस्थित करे और यदि बिक्री के टारगेट और ईवी उद्योग में उछाल की उम्मीद है, तो अधिक अनुकूल माहौल लाए। केवल सरकारी समर्थन से ही उद्योग स्वच्छ और ग्रीन एनर्जी की ओर आगे बढ़ सकता है।

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