नई दिल्ली । जिंदगीभर घर और ऑफिस की भागदौड़ में उलझा व्यक्ति एक उम्र के बाद सिर्फ खुद पर और अपने आराम पर ध्यान देने की कोशिश करता है। लेकिन इस मामले में कुछ अपवाद भी सामने आते रहते हैं। डॉ. एनएस धानम भी उन्हीं अपवादों में से एक हैं. 91 साल की उम्र में डॉक्टरेट की डिग्री लेकर उन्होंने साबित कर दिया कि शिक्षा उम्र के बंधन में जकड़ी हुई नहीं होती है। अगर मन में चाह हो तो रिटायरमेंट के बाद भी पढ़ाई-लिखाई की जा सकती है।

डॉ. एनएस धानम का जन्म 1934 में आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के पिथापुरम में हुआ था. साधारण परिवार में पले-बढ़े डॉ. एनएस धानम ने अपनी शुरुआती शिक्षा विशाखापत्तनम के मिसेज एवीएन हाई स्कूल से पूरी की थी। फिर 1954 में उन्होंने आंध्र यूनिवर्सिटी से बीएससी की डिग्री हासिल की। कम उम्र से ही वह काफी जिज्ञासु थे और उनके अंदर हरदम कुछ नया सीखने की ललक थी। रिटायरमेंट के बाद भी उनके कदम थमे नहीं और वह डिग्री लेने के सफर पर आगे बढ़ते रहे।

कॉरपोरेट करियर और रिटायरमेंट
डॉ. एनएस धानम ने अपनी प्रोफेशनल जिंदगी की शुरुआत ऑयल इंडस्ट्री से की थी। दशकों तक कॉरपोरेट जगत में अपनी एक्सर्टीज, लीडरशिप और इनोवेशन के साथ कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 1994 में 60 साल की उम्र में उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया। जहां कई लोगों के लिए यह उनके प्रोफेशनल करियर का The End होता है, वहीं डॉ. एनएस धानम के लिए यह नई शुरुआत थी। इस उम्र में उन्होंने आराम करने के बजाय फिलॉसफी में रुचि डेवलप की और इसे ही अपनी दूसरी पारी का आधार बनाया।

81 की उम्र में ली पीएचडी
2015 में, 81 साल की उम्र में, डॉ. एनएस धानम ने आंध्र यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र में पीएचडी के लिए एडमिशन लिया. प्रोफेसर केआर राजिनी (वर्तमान में डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी, श्रीकाकुलम की कुलपति) के गाइडेंस में उन्होंने कठिन रिसर्च शुरू की। 1970 के दशक से वह भगवद गीता, उपनिषद और ब्रह्म सूत्र जैसे ग्रंथों में रुचि ले रहे थे। उनकी पीएचडी का विषय जीवन के बेसिक सवालों के बीच कॉम्प्लेक्स रिलेशंस पर आधारित था। उम्र से संबंधित हेल्थ इश्यूज को पार करते हुए उन्होंने 2015 में अपनी पीएचडी पूरी की।

91 की उम्र में भी नहीं थमे कदम
इसके बाद 2025 में 91 साल की उम्र में उन्होंने अपनी रिसर्च को और आगे बढ़ाते हुए वियतनाम नेशनल यूनिवर्सिटी से डी.लिट. (डॉक्टर ऑफ लिटरेचर) की मानद उपाधि हासिल की। विशाखापत्तनम में एक समारोह में जब उन्हें यह उपाधि दी गई तो लोगों ने खड़े होकर तालियों से उनका हौसला बढ़ाया। डॉ. एनएस धानम ने मीडिया इंटरव्यू में बताया कि पिछले कई दशकों से वह अपनी फिजिकल हेल्थ पर बहुत फोकस कर रहे हैं। उसी के दम पर वह इस उम्र में इतना कुछ कर पा रहे हैं।

विदेश में हैं दोनों बेटे
डॉ. एनएस धानम की पत्नी लक्ष्मी का निधन 2018 में हो गया था। उसके बाद से डॉ. एनएस धानम बेंगलुरु के सीनियर सिटीजन होम में रह रहे हैं। उनके बड़े बेटे सुब्बी (67) नॉर्वे में मरीन इंजीनियर हैं और छोटे बेटे कृष धानम (63) अमेरिका में मोटिवेशनल स्पीकर, एग्जीक्यूटिव कोच और लेखक हैं। 91 की उम्र में भी डॉ. एनएस धानम काफी एक्टिव हैं. वे रोजाना वॉक पर जाते हैं, स्नूकर खेलते हैं और बैलेंस्ड लाइफस्टाइल अपनाते हैं। इसी से वह मेंटली और फिजिकली इतने फिट हैं।

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