उज्जैन : इस बार सावन का महीना श्रद्धा और आस्था के लिहाज से ऐतिहासिक रहा। बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे कि पिछले सभी आंकड़े पीछे छूट गए। पहली बार एक ही श्रावण माह में महाकालेश्वर के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या डेढ़ करोड़ से अधिक दर्ज की गई।

तीसरे सोमवार को सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे

इस बार सावन का तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को नागपंचमी के साथ आया। दोनों पर्व एक ही दिन होने के कारण उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक काफी बढ़ गई। भक्तों ने एक ओर बाबा महाकाल के दर्शन किए, वहीं नागचंद्रेश्वर मंदिर में भी पूजा-अर्चना का अवसर मिला।श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक के मुताबिक, पूरे श्रावण माह में 1 करोड़ 10 लाख 90 हजार 725 श्रद्धालुओं ने महाकालेश्वर के दर्शन किए। वहीं चार सवारी और नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन करने वालों की संख्या 43 लाख 75 हजार रही। दोनों आंकड़ों को मिलाने पर कुल संख्या 1 करोड़ 53 लाख 75 हजार तक पहुंच गई।पिछले साल श्रावण माह में करीब 72 लाख श्रद्धालु महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे थे। इस लिहाज से इस बार श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।

कावड़ यात्रा से लेकर अन्नक्षेत्र तक दिखा आस्था का व्यापक असर

सावन के दौरान 5 लाख से अधिक कावड़िए उज्जैन पहुंचे। मंदिर परिसर और आसपास श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए भी व्यापक इंतजाम किए गए थे। अन्नक्षेत्र में 3,41,083 श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की, जबकि पांच अलग-अलग स्थानों पर 2,71,956 कावड़ियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई।श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने के तहत 10 हजार लोगों को निशुल्क चरण पादुका भी वितरित की गई। इसके अलावा 5 लाख 66 हजार 350 भक्तों ने शीघ्र दर्शन टिकट के जरिए बाबा महाकाल के दर्शन किए।

मंदिर समिति की आय में भी हुआ बड़ा इजाफा

श्रावण माह में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या का असर मंदिर प्रबंधन समिति की आय पर भी दिखाई दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार समिति को कुल 14 करोड़ 22 लाख 37 हजार 500 रुपये की आय हुई। वहीं लड्डू प्रसादी की बिक्री से 10.32 करोड़ रुपये की आमदनी दर्ज की गई।इससे साफ है कि सावन के दौरान उज्जैन में धार्मिक गतिविधियों के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी श्रद्धालुओं की भारी मौजूदगी का व्यापक प्रभाव पड़ा।

साल में एक बार खुलते हैं नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट

महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर की अपनी विशेष धार्मिक मान्यता है। मंदिर के कपाट सामान्य दिनों में बंद रहते हैं और नागपंचमी के अवसर पर साल में सिर्फ एक बार श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।इस वर्ष नागपंचमी सोमवार को होने के कारण महाकाल और नागचंद्रेश्वर दोनों के दर्शन का अवसर एक ही दिन मिला। यही वजह रही कि उस दिन उज्जैन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और कुछ समय के लिए व्यवस्थाओं पर भी दबाव बना। हालांकि प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की व्यवस्थाओं के चलते स्थिति बाद में सामान्य हो गई।