स्वजन को ज्यादा पूछताछ करने पर मिल रही झिड़की, एमएस के संज्ञान में आया मामला

अंबिकापुर। मेडिकल कॉलेज अस्पताल का गायनिक वार्ड लापरवाही व मरीजों के स्वजनों को दी जाने वाली झिड़की के लिए आए दिन सुर्खियों में रहता है। भर्ती मरीजों के स्वजन को संतोषप्रद जवाब देने के बजाए कुछ जिम्मेदारों द्वारा किए जाने वाले अव्यवहारिक बर्ताव के कारण सवालिया निशान लगने जैसी स्थिति बनती है। इसी कड़ी में चार दिन से मृत बच्चे को पेट में लिए भर्ती महिला का मामला सामने आया है। सोनोग्राफी के बाद चिकित्सक ने महिला को भर्ती तो कर लिया, लेकिन मृत बच्चे को कब बाहर निकाला जाएगा, इसका जवाब स्वजन को देने वाला कोई नहीं है। इनका आरोप है कि डॉक्टर से कुछ भी पूछने पर वास्तविक स्थिति बताने के बजाए वे उन पर ही बरस पड़ते हैं। दवा दे रहे हैं, कहकर शांत कर दिया जाता है।

जानकारी के मुताबिक बलरामपुर जिला के राजपुर थाना अंतर्गत ग्राम सिधमा निवासी साकेत भुंइया की पत्नी अनिमा भुंइया 22 वर्ष छह माह की गर्भवती है। गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए समय-समय पर उसे आवश्यक सलाह दिया जा रहा था। छह माह का गर्भ होने के बाद भी जब बच्चे के हलचल को लेकर असमंजस की स्थिति बनी तो वे उसका सोनोग्राफी जांच कराने के लिए पांच अप्रैल को अंबिकापुर पहुंचे। शहर के एक निजी सोनोग्राफी सेंटर में जांच कराने के बाद इन्हें पता चला कि पेट में ही बच्चे की मौत हो गई है। इसके बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में चिकित्सक ने महिला को भर्ती कर लिया। पुन: अस्पताल में सोनोग्राफी जांच कराने के बाद स्वजन मृत बच्चे को बाहर निकालने का इंतजार करते चार दिन बिता दिए। पूछताछ में स्वजन को एक ही जवाब मिला कि दवा दिए हैं, नार्मल बच्चे के बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं। ज्यादा पूछताछ करने पर कहीं और मरीज को ले जाने के लिए कहा गया। महिला के पति साकेत सहित अन्य का कहना था कि अंदर बैठे डॉक्टर ऐसा डांटते हैं कि कुछ पूछते ही नहीं बनता है। वे इस बात से भी अनजान हैं कि बच्चे की मौत सोनोग्राफी कराने के पहले कब हुई है। ऐसे में उनके बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। मृत बच्चा गर्भ में ज्यादा समय तक रहने के कारण इंफेक्शन व खतरे की स्थिति बन सकती है। भर्ती महिला को किसी प्रकार की और तकलीफ न पहुंचे, इसे लेकर स्वजन पशोपेश में रहे।

अधीक्षक की बातों से हुए संतुष्ट
मामला चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या के संज्ञान में आया तो उन्होंने गायनिक विभाग के जिम्मेदारों से संपर्क किया। भर्ती महिला के स्वजन भी अपनी परेशानी से अधीक्षक को चेम्बर में जाकर बताए। अधीक्षक ने इन्हें आश्वस्त किया कि अगर नार्मल बच्चे के बाहर आने की स्थिति नहीं बनती है, तो ऑपरेशन करके मृत बच्चे को बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने गायनिक विभाग के चिकित्सक से बात की है। अधीक्षक की बातों से पीड़ित महिला के स्वजन संतुष्ट तो नजर आए, लेकिन गायनिक विभाग के जिम्मेदारों का रूखापन इन्हें टीस रहा था।

Categorized in: