जनजीवन के लिए खतरनाक पेड़ों की कटाई-छंटाई की ओर किसी का ध्यान नहीं
अंबिकापुर। शहर के हृदयस्थल, जिला न्यायालय के मुख्य प्रवेश द्वार से कलेक्टोरेट प्रवेश द्वार के दोनों तरफ लगे अत्यंत पुराने जर्जर पेड़ों के कारण मुख्य मार्ग में बारिश के मौसम में जनहानि की प्रबल संभावना नजर आ रही है। यहां जर्जर पेड़ों के कारण दुर्घटना की आशंका बराबर बनी रहती है। बरसात के मौसम में यह खतरा अत्यधिक बढ़ जाएगा क्योंकि अधिकांश जर्जर पेड़ अत्यधिक झुक गए हैं, इन्हें देखकर दुर्घटना का खतरा मंडराने लगता है। उक्त जर्जर पेड़ों की डालियों से लिपटे हुए विद्युत तारों में प्रवाहित बिजली का भी खतरा बने रहता है, परंतु विद्युत विभाग और नगर निगम के अमले को किसी बड़ी दुर्घटना की प्रतीक्षा है। यहां पर इतनी ज्यादा खतरनाक स्थिति स्पष्ट रूप से नजर आने के बाद भी प्रशासनिक अमला इसे अनदेखा कर रहा है।
बता दें कि जिला न्यायालय एवं कलेक्टोरेट कार्यालय में हजारों की संख्या में लोग अपने काम से आते-जाते हैं। इस मार्ग में कई पान ठेला, चाय दुकान और अन्य खाने-पीने के ठेले लगे रहते हैं, जिनमें किसी काम से न्यायालय या कलेक्टोरेट आने-जाने वाले लोग जलपान करते हैं। अधिवक्ता भी फुर्सत के पलों में यहीं चाय, नाश्ता के लिए बैठे रहते हैं। इन हालातों के बीच यदि कोई पेड़ गिरता है तो जनहानि या घायल होने की प्रबल संभावना बन सकती है। ऐसे में यहां पर विशेष अभियान चलाकर विशाल पेड़ा के डालियों की कटाई-छंटाई और झुके हुए जर्जर पेड़ों को हटाने की जरूरत महसूस की जा रही है, नहीं तो यह मार्ग लोगों के लिए खतरनाक बना रहेगा। जिला प्रशासन को चाहिए कि संभावित खतरे को भांपते हुए तत्काल संबंधित विभागों को निर्देश देकर तत्काल ऐसे पेड़ों की छटाई, कटाई अभियान चलाया जाए, ताकि आने वाली मुसीबत को टाला जा सके और जनहित में होने वाली दुर्घटना से बचाव संभव हो सके.। बीते वर्ष की स्थिति पर गौर करें तो कलाकेंद्र मैदान में एक वृहद कार्यक्रम के दौरान पेड़ धराशायी होने की घटना हुई थी, जिसमें कई वाहन दब गए थे और कुछ लोग घायल हुए थे। घड़ी चैक में भी विशाल पेड़ धराशायी हुआ था, जिसकी चपेट में आने से कई फुटपाथ में दुकान लगाकर जीवकोपार्जन करने वाले बाल-बाल बच गए थे। इसके बाद भी जनजीवन के लिए खतरा बने पेड़ों की कटाई-छटाई के प्रति रूचि नहीं लेना समझ से परे है।

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